इमरान अहमद
गोंडा।पवित्र माह रमजान में रोजा के साथ घर में रहकर काम करने के साथ इबादत करने वाली महिलाएं खास पकवान बनाती है। इन महिलाओं का दिनचर्या बदल जाता है। पवित्र माह रमजान में घर की ज़िम्मेदारी बढ़ गई है।सुबह 3 बजे से उठ कर वो घर के काम के साथ इबादत करती हैं।12 घंटे का रोजा रखने के बाद भी वह थकान नहीं होती,बल्कि दिनभर तरोताजा महसूस करती हैं। ऐसी महिलाओं का रमज़ान में किस तरह गुजरता है उनका दिन।
महिलाओं की बात
रमज़ान बरकत और नेकी कमाने वाला महीना है। महिलाएं इबादत के साथ-साथ घर का काम भी उसी उत्साह के साथ करती है। सुबह से इबादत के बाद दोपहर में नमाज अदा करने के बाद अफ्तारी तैयार करने में मशगूल हो जाती है। पूरा दिन कैसे गुजर गया। पता ही नहीं चला।
-रेहाना गृहणी-जगदीशपुर कटरा
रमजान का महीना हमें बहुत सारी जिम्मेदारियों का अहसास कराता है। अमन, सलामती, मोहब्बत, भाईचारे और दुखी इंसानियत की जरूरतें पूरी करने का मौका देता है। कई वर्षो से रोजा रखती हूं।रोजे रखने से रुहानी ताकत महसूस करती हूं।
-समीना बेगम,गृहणी रसूलपुर
गृहणी रहीमुन निशा ने बताती हैं कि मुबारक रमजान साल में एक बार ही आता है। ऐसे में मगफिरत करने, तरावीह पढ़ने से समय का पता नहीं चलता। अलसुबह उठकर सहरी तैयार करना। इबादत करना तो दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। इसके लिए वक्त निकालने जैसी कोई बात नहीं है।
-रहीमुन निशा गृहणी नगवा
रमज़ान में घर में काम करने के साथ रोजे रखना, इबादत करना रुटीन में शामिल हो जाता है। सुबह तीन बजे उठकर रोजा रखने के लिए सहरी का इंतजाम करना सब इस महीने की बरकत से ही आसानी से हो जाता है।
– रुमाना,आलिमा-फाजला धनेश्वरपुर
इस साल रमज़ान में महिलाओं के साथ पुरुष भी इबादत कर रहे है। घर के सारे आदमी अलग नमाज़ पढ़ते है, वहीं सारी महिलाएं एक साथ इबादत करती है। घर का काम करने के साथ दुआ करते हैं। अल्लाह से अपने लिए और दूसरे इंसानों के लिए दुआ मांगते हैं।
– शाहजहां,गृहणी अचलपुर

