मुश्ताक अहमद
गोंडा।मामला एक:मछली मंडी व निरीक्षण गृह से सटा रिहायशी इलाका गोंडा जिले के वजीरगंज बाजार का हार्ट कहा जाता है। जो आज भी मिलेट्री विभाग की नान जेड०ए० जमीन है। दो दशक पूर्व राजस्व व चकबंदी कर्मियों की कारगुजारी के चलते इस जमीन का अधिकांश भाग ऐसे लोगों के नाम इन्द्राज कर दिया गया है जो यहां हैं ही नहीं। इसका फायदा उठाते हुए इलाके के दो दर्जन से अधिक लोगों की निगाहें 13 हेक्टेयर भूमि पर गड़ गई। भू-माफियाओं ने आनन-फानन में कथित वसीयत नाम के बल पर एसडीएम तरबगंज के न्यायालय में धारा 229 वी०जेड०ए०एफ० के तहत सरकार प्रति कमलाकांत का वाद मिलेट्री विभाग द्वारा दायर किया गया था। खातेदारों का नाम कटने को कौन कहे इन लोगों ने बीते एक दशक से नाजायज तरीके से अदालत पर ही लंबित कर रखा है।
मामला दो:गोंडा-अयोध्या हाईवे पर अरबों रूपए की बेशकीमती नारकोटिक्स विभाग की भूमि पर भू-माफियाओं का लगातार कब्जा बढ़ता ही जा रहा है। विभागीय अधिकारी भूमि की सुरक्षा के बजाय यदा-कदा आकर कब्जेदारों से अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति करके चले जाते हैं। जिससे कब्जा करने वालों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। ये दो मामले महज बानगी हैं। वजीरगंज क्षेत्र के गांवों में तालाब, बंजर, चारागाह की भूमि व फर्जी बैनामा कराने में भू-माफियाओं का कहर जारी है।
वजीरगंज क्षेत्र में जालसाजी कर जमीन हथियाने वालों का बड़ा रैकेट काम कर रहा है। रसूख दारों के संरक्षण में चलने वाले रैकेट में राजस्व विभाग के जानकार लोगों के अलावा रिटायर्ड राजस्व कर्मचारी व अधिकारी शामिल होने की बात सामने आई है। जो निवंधन कार्यालय में फर्जी रजिस्ट्री वसीयत करवाने से लेकर राजस्व रिकार्ड में भी हाथ आजमाने में कामयाब हो रहे हैं।
बायोमीट्रिक पहचान पर लगा ग्रहण
निबंधन कार्यालयों में फर्जी रजिस्ट्री रोकने व जालसाजों को बेनकाब करने के लिए बायोमीट्रिक पंचिंग व मौके पर फोटोग्राफी जैसे हाईटेक तकनीक से भी जालसाजी नहीं रुक पा रही है। कोई भी किसी की वसीयत, रजिस्ट्री करने में थोड़ी सी मशक्कत के बाद सफल हो जा रहा है। इसके अलावा भूलेख साफ्टवेयर के जरिए आनलाइन जमीनों की वास्तविकता की जांच किए जाने की प्रक्रिया पर भी अमल न होने से रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा करने वालों को तुरंत पकड़ा नहीं जा पा रहा है। अधिसंख्य मामलों में जमीन की रजिस्ट्री किए जाने के बाद सामने आते हैं।
अधिकारी उवाच
जमीन के राजस्व रिकार्ड में जालसाजी का परीक्षण आशंका होने पर जांच करवाया जाता है। आमतौर पर स्टाम्प शुल्क अदा करने के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया रोके जाने का नियम नहीं है। अगर कोई फर्जी तथ्यों पर रजिस्ट्री करता है या करवाता है तो वह रजिस्ट्री जांच के बाद शून्य कर दी जाती है।

