मुश्ताक अहमद
गोंडा।वजीर-ए-आला की सरजमीं के वाशिंदे अब स्वाद के साथ ही सेहत ठीक रखने के लिए वे मछली की तरह-तरह की डिश पर जोर दे रहे हैं।उनकी शौक ने पांच वर्ष में वजीरगंज में मछली की खपत दो गुनी कर दी है। पहले तो हैदराबादी मछलियों से काम चलता था,अब लोकल मछलियों की मांग बढ़ी है।इससे मछली पालन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
जानना रोचक है कि इलाके में मछली की आधा दर्जन मंडियों में डुमरियाडीह,टिकरी,कोंडर,वजीरगंज,खोंरहसा,चंदापुर से 50-60 कुंतल यानि 10 लाख से अधिक की मछली बिक रही है। करीब एक दशक पूर्व बड़गांव में मछली का थोक कारोबार होता था।मौजूदा समय में देहात कोतवाली के पास थोक व्यापार शिफ्ट हुआ।तीन दशक से मछली के थोक कारोबार से जुड़े इश्ताक बताते हैं कि गोंडा मण्डी की स्थापना के शुरुआती दिनों में हैदराबाद से तीन से चार गाड़ियों में मछलियां आती थीं अब लोकल मछलियों की डिमांड काफी बढ़ गई है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
नूर हेल्थ केयर के चिकित्सक डा० रियाजुद्दीन बताते हैं कि मछली में कोलेस्ट्रॉल व ओमेगा-थ्री एसिड कम मात्रा में होता है।विटामिन ए व आयोडीन की भी मछली में बड़ी स्रोत है।हार्ट के मरीजों के लिए मछली का सेवन बेहतर है।सुपाच्य होने के चलते भी इसका सेवन सुरक्षित है।विशेषज्ञ मानते हैं कि मछली का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद है।
विदेशों में मशहूर है कोंडर की मछली
वैसे तो बैकर,रोहू,सिल्वर,आरसी,सुहया आदि मछली पापुलर कटेगरी में मानी जाती है।पर अरंगा-पार्वती झील में मिलने वाली मोए मछली की मुंह मांगी कीमत मिलती है।कोंडर झील की मछलियों के बारे में कहा जाता है कि यहां का रोहू विदेशों तक मशहूर है।यहां सर्वाधिक विक्री रोहू,भाकुर मछलियों की होती है। मछली कारोबार से जुड़े इस्लाम कहते हैं कि सितंबर से मार्च तक मछली बाजार गुलजार रहती है।मई से जुलाई तक व्रीडिंग सीजन होने से लोगों में उन दिनों मछली की खपत कम होती है।
जिंदा मछली की डिमांड बढ़ी,सूखी भी कम नहीं
आठ से दस दिन पुरानी बर्फ में रखी हैदराबादी मछलियों की अपेक्षा जिंदा मछली की मांग ज्यादा बढ़ी है।पथरी झील,अरंगा-पार्वती झील,कोंडर झील के अलावा टेढ़ी नदी व मड़हा सम्मय की जिंदा मछलियों को लोग प्रमुखता देते हैं।मछली कारोबार से जुड़े सलीम कहते हैं कि प्रतिदिन दो से तीन पिकप सूखी मछली यहां आती है।ये मछली ट्रक से महाराष्ट्र और गुजरात से गोंडा आती है।

