गुलाम जीलानी बेग
सादुल्लाहनगर,बलरामपुर।उत्तर प्रदेश में तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रस्तावित सम्मेलन और राज्य स्तरीय ग्रामीण बैंक के गठन को लेकर प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक ऑफिसर एसोसिएशन ने विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने बैंक ऑफ बड़ौदा को प्रायोजक बैंक बनाए जाने के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त की है और इसके स्थान पर पंजाब नेशनल बैंक को प्रायोजक बैंक बनाने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश में वर्तमान में तीन क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक (प्रवर्तक: पंजाब नेशनल बैंक) बड़ौदा यूपी बैंक (प्रवर्तक: बैंक ऑफ बड़ौदा) आर्यावर्त बैंक (प्रवर्तक: बैंक ऑफ इंडिया) कार्यरत हैं।
इनका समामेलन कर राज्य स्तरीय ग्रामीण बैंक बनाने की प्रक्रिया चल रही है। प्रस्ताव में बैंक ऑफ बड़ौदा को प्रायोजक बैंक बनाए जाने और प्रधान कार्यालय राज्य की राजधानी लखनऊ में स्थापित किए जाने की बात कही गई है।
ग्रामीण बैंक कर्मचारियों ने बैंक ऑफ बड़ौदा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं कि कर्मचारियों को लगातार प्रताड़ित किया जाता है। सुविधाओं और भत्तों में कटौती की जा रही है। कर्मचारियों की पदोन्नति पिछले तीन वर्षों से लंबित है।
शाखाओं को बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है। इस प्रकार की कार्यशैली से कर्मचारियों और ग्राहकों,दोनों के हित प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि पंजाब नेशनल बैंक की कार्यशैली स्टाफ और ग्राहक हितैषी है। इसलिए इसे प्रायोजक बैंक बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, प्रस्तावित राज्य स्तरीय ग्रामीण बैंक का प्रधान कार्यालय राजधानी लखनऊ में होना चाहिए, ताकि प्रशासनिक कामकाज सुगम हो सके।
प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों सौरव यादव, अभिषेक सिंह और मानविजय ने इस विषय पर विदेश और राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से पंजाब नेशनल बैंक को प्रायोजक बनाने और प्रधान कार्यालय लखनऊ में स्थापित करने की मांग की गई। अगर कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो एसोसिएशन ने आंदोलन का संकेत दिया है। यह मामला न केवल कर्मचारियों के हित से जुड़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश के 25 करोड़ ग्रामीण नागरिकों के वित्तीय अधिकारों और सेवाओं पर भी प्रभाव डालता है।

