इमरान अहमद
गोंडा।हम इश्क के बंदे हैं,मजहब से नहीं वाकिफ,गर काबा हो तो क्या बुतखाना हो तो क्या! अवध सूबे के अंतिम शासक नवाब वाजिद अली शाह की जुबान इस लाइन के साथ यूं ही नहीं दर्ज। इसके पीछे संपूर्ण अवध और विशेष रुप से उस अयोध्या का संस्कार था, जहां से उनके पुरखों ने सूबे का शासन किया। मेरे दिल की धड़कन हैं, मेरी आंख के तारे हैं, इन्हें अपना समझकर पास न रख लेना,प्रभु राम जितने तुम्हारे…उतने ही हमारे हैं।ये दिल के भाव हैं रामनगरी से सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल मोहम्मद आमीन सिद्दीकी के। साथियों के साथ बात करने के दौरान ही दिल के उद्गार जुबां पर आ गए। पवित्र नगरी अयोध्या धाम में प्रभु श्रीराम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा से वजीरगंज के महादेवा गांव निवासी मोहम्मद आमीन सिद्दीकी या उनके साथी ही आह्लादित नहीं बल्कि हर आस्थावान अभिभूत है।
सोमवार को इनके घर पर थी चहल पहल
सोमवार को जब रामनगरी में पीएम मोदी द्वारा प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम चल रहा था। उस समय महादेवा गांव में मोहम्मद आमीन सिद्दीकी के घर के बगल दुर्गा पूजा स्थान पर जय श्रीराम का उद्घोष हो रहा था तो इनके दरवाजे पर भी खूब चहल-पहल थी। लोग व्यस्त थे और मंदिर की तरह घर, सड़क, गलियां सजा रहे थे और बीच-बीच में आपस में चर्चा शुरू हो जाती तो श्रीराम के प्रति उनकी आस्था और उद्गार शब्दों की शक्ल लेकर बाहर आ रहे थे। घर में श्रीराम के चित्र के साथ भगवा ध्वज लगा था।भगोहर निवासी चंद्रदेव भारती, महादेवा निवासी अन्नू बाबा,बलकरन और मोहम्मद आमीन सिद्दीकी के बीच बातचीत चल रही थी।
पीएम मोदी ने बनते तो न बनती मंदिर
चिश्तीपुर में बाइक मरम्मत कर रहे सलीम भाई की दुकान पर राहुल मौर्य, संजय चौहान, रमेश प्रताप सिंह आदि लोग बैठे थे। मंदिर की चर्चा चली तो बोल पड़े- नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री न बनते तो मंदिर न बन पाती। उनकी इच्छा शक्ति ही थी कि आज भव्य मंदिर बन गया है।

