मुश्ताक अहमद
गोंडा।महंगाई से जूझ रहे लोगों के बीच जनपद के धान किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मौजूदा समय में धान की रिकॉर्ड पैदावार होने के आसार है। जिसका प्रमुख कारण मानसून की बारिश और समय-समय पर नम हवाएं माना जा रहा है। इस बार खरीफ की मुख्य फसल धान और गन्ना पर प्रकृति की मेहरबानी जमकर बरस रही है।
महंगाई के चलते आर्थिक संकट के बीच धान किसानों के लिए राहत का ये पैगाम किसी खास खुशी से कम नहीं है। कृषि विदों ने भी स्वीकार किया है कि इस बार किसानों को धान और गन्ना की फसल वाजिब लाभ देने को आतुर हैं। क्योंकि मौसम ने किसानों का खूब साथ दिया। फसलों की आवश्यकता अनुसार हुई बारिश ने खरीफ फसलों को संजीवनी दे दिया है। जिसका क्रम आज भी बरकरार है। गत वर्ष की अपेक्षा इस खरीफ वर्ष 023 में फसलों की पैदावार दूनी आंकी जा रही है। किसानों में अब फसलों की सुरक्षा के इंतजामात के अलावा ज्यादा काम भी नहीं करना होगा।
बता दें कि पिछले साल किसानों की खरीफ फसलों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। जिसका कारण सामयिक बारिश का अभाव रहा। कम बारिश का एक और असर ये रहा कि किसानों की पूंजी लागत में काफी वृद्धि रही। जिसके कारण किसानों की किसानी की साख पर बट्टा लगा। समुचित संसाधन जिन इलाकों में कम या नहीं थे। ऐसे इलाकों के किसानों को खासी मशक्कत के बाद भी उचित मूल मयस्सर नहीं हो पाया था। जिसकी भरपाई इस बार कुदरत ने करने को ठानी तो किसानों की मुस्कान वापिस लौट आई।
विशेष ध्यान दें फसलों की सुरक्षा का
धान की फसलों में बालियां आते ही उनकी सुरक्षा का दायित्व किसानों में बढ़ जाता है। समुचित देखरेख यदि किसान इस दौरान करते है तो फसलों को नुक्सान से बचाया जा सकता है। बता दें कि इस दौरान फसलों में बाली चट करने वाले कीट, तना बेधक कीट या फंफूदी जनित बीमारी का प्रकोप संभावित होता है। लेकिन ऐसे बीमारियों की शिकायत पर किसानों की फसलों में गैलेलियो, प्रपोकोनाजोल, हेक्सकोनाजोल या त्रिपकिनजोल में से किसी एक दवा का छिड़काव 400 एमएल की मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से करना चाहिए। यदि दवाओं के उपयोग की जानकारी कृषि विभाग के जानकारों से लेकर करें तो अधिक लाभकारी होगा।
उर्वरक संतुलन जरूरी
धान की फसलों को जितना अधिक मात्रा उर्वरकों की होती है उससे ज्यादा कहीं उसके सही संतुलन की होती है। अतः फसल में बाली या बाली आने के वक्त इनका उपयोग करें तो ध्यान रखें कि की बार में मात्रा कम करके करें। यानि उपयोग की मात्रा कम और उपयोग करने की क्रम संख्या ज्यादा हो।
पर्याप्त नमी का रखें ध्यान
फसलों में फल आने के समय खेतों के पोषण का उचित ध्यान देना जरूरी होता है। जैसे धान के फसल में बालियों के आने के समय मिट्टी में समुचित नमी जरूरी है। यदि समय से बारिश न हो तो सिंचाई करें किन्तु ध्यान रखें कि पानी ओवर न हो।

