गोण्डा।यूं तो हर दर्द की दवां यहां मिलती है। लेकिन नहीं मिलती तो वो है अव्यवस्था की दवां। जी हां बात हो रही है। जिले के मेडिकल कालेज के खिताब से नवाजे गए बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल की। जहां सुबह होते ही मरीजों की लग जाती है लम्बी लम्बी कतारें। अव्यवस्थाओं से भरे इस अस्पताल में मर्ज से ज्यादा अव्यवस्था का दर्द फैला हुआ है। अव्यवस्थाओं से भरे इस अस्पताल में मरीजों की सुनने वाला कोई नहीं।

ऐसा ही हाल सोमवार को जिले के मेडिकल कालेज अस्पताल में हर रोज नजर आ जाएगा। जहां मरीज की लगी लम्बी कतारों के बीच लोगों की फूलती सांसे, अज्ञात घायलों को देखने की फुरसत व आइसोलेशन में बंद असाध्य मानसिक रूप से बिमार लोग। सब गड़बड़झाला ही दिखाई पड़ेगा।
सीन:-1 समय दोपहर 1:03 बजे
इमरजेंसी रूम के बाहर स्ट्रेचर पर घायलावस्था में पड़ा व्यक्ति अरविंद पुत्र रघुवेन्द्र घंटों तड़पता रहा।मनकापुर सीएचसी से पुलिस द्वारा लाए गए व्यक्ति को अस्पताल कर्मी देखने को राजी नहीं रहा।

सीन:-2 समय दोपहर 1:44 बजे
अस्पताल परिसर में पर्चा व दवां काउंटर पर लगी मरीजों की भीड़ देख हर कोई की भी सांसे ऊपर नीचे हो सकती है। सुबह से लाइन लगाए मरीजों को एक अदद पर्चा पाने व दवां लेने के लिए बड़ी जद्दोजहद करना पड़ जाता है। किसी तरह पर्चा या दवां मिल भी गई। लेकिन जब तक काफी देर हो जाती है और चिकित्सक मिल नहीं पाते।

सीन:-3 समय दोपहर 1:56 बजे
टीबी के मरीजों को भर्ती कृने के लिए बना आइसोलेशन वार्ड इन दिनों असाध्य रोगों मानसिक रूप से बिमार व्यक्तियो के लिए बन गया है। जहां टीबी के मरीज की जगह मानसिक रूप से बिमार लोगों से भरा हुआ है। ऐसे में यहां पर आने वाले टीबी के मरीज इन मानसिक रूप से बिमार को देख दूर भागने लगते है। इस सम्बंध में अस्पताल के स्टाफ नर्स से पूछा गया तो उसका कहना था कि हम लोग क्या कर सकते है।


