मुश्ताक अहमद
गोंडा।जनपद के वजीरगंज विकास खंड की कोंडर गांव में महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली अपनी पहचान के लिए तरस रही है। महर्षि पतंजलि के नाम पर राज्य सरकार ने करनैलगंज में महर्षि पतंजलि सूचना प्रौद्योगिकी पालीटेक्निक वहीं जिला प्रशासन ने मुख्यालय पर वेंक्टा चार्य क्लब परिसर में महर्षि पतंजलि स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण कराया है। महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को संरक्षित कर एक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने के लिए करीब दो दशक से संघर्ष कर रही श्री पतंजलि जन्मभूमि न्याय समिति ने यूनेस्को समेत केन्द्र व राज्य सरकारों को कई बार पत्र लिखा। बावजूद इसके अबतक इस दिशा में कुछ सकारात्मक पहल नहीं हुई।

यह स्थान अयोध्या से उत्तर और गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर सूकर खेत से पूर्वोत्तर वजीरगंज कस्बे के पास कोंडर झील के तट पर स्थित है। महाभाष्य के अनुसार पतंजि गोनार्द प्रदेश के वासी प्रतीत होते हैं। किंतु आज का गोंडा यदि प्राचीन गोनार्द हो तो वह अयोध्या के समीप है, ऐसा कई जानकारों का मानना है। पतंजि के गोनर्दीय गोड़िका पुत्र, नागनाथ, चूर्णियाकार, शंखराज और सर्पाकार जैसे अन्य नाम भी है।
डाक्टर स्वामी भगवदा चार्य का कहना है कि महर्षि पतंजिल ने स्वंय व्याकरण महाभाष्य में अपनी जन्मस्थली कोंडर का जिक्र किया है। उन्होंने स्वंय को बार-बार गोनर्दीय कहा है। व्याकरण शास्त्र की ऐतिहासिक समीक्षा करने वाले जानकारों के अनुसार त्रिजटा ब्रहम्मा ही पतंजलि के रुप में गोनार्द में अवतरित हुए। उनका मत है कि सूत्रकार, वृत्ताकार और भाष्कर ही उनके तीनों जटाओं के प्रतीक हैं। योगवृत्त के अनुसार योग के प्रेरणता महाभाष्य के टीकाकार और आयुर्वेद ग्रंथ संहिता के रचनाकार एक ही व्यक्ति थे।

किदवंती है कि शेषावतार के रुप में पतंजलि की जन्म से पहले सरयू नदी ने यहां से अपनी चंचलता का परित्याग किया, जिसके बाद यहां कोंडर झील अस्तित्व में आई। मान्यता है कि महर्षि पतंजलि एकांतवास में बैठकर अपने शिष्यों को उपदेश दिया करते थे। एक दिन गुरु के दर्शन की लालसा में एक शिष्य ने अंदर झांका उसी दिन सर्पाकार महर्षि अदृश्य हो गये।
बकौल डाक्टर स्वामी भगवदा चार्य महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाकर पर्यटन स्थल घोषित करने के लिए समिति द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है। समिति ने यूनेस्को को पत्र लिखकर इस स्थान को संरक्षित करने की मांग की, केन्द्र व प्रदेश सरकार को भी दो दर्जन पत्र भेजे जा चुके हैं। समिति प्रत्येक वर्ष 21 जून को यहां कार्यक्रम आयोजित करती है। उन्होंने बताया कि कोंडर में एक योग विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पीएम को पत्र भेजा था,जिसे आवश्यक कार्यवाही के लिए आयुष मंत्रालय भेजा गया है।
वादा कर भूल जाते हैं जनप्रतिनिधि
महर्षि पतंजलि न्याय समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इलाकाई जनप्रतिनिधियों को बुलाया जाता हैं और वो वादा निभाना भूल जाते हैं।महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किया जायेगा और इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाए जाने का प्रयास,एक भव्य व्यायाम शाला, महर्षि पतंजलि की प्रतिमा, मंदिर परिसर व कोंडर झील का सुंदरी करण कराये जाने का वादा हर साल किया जाता रहा है।

