खरगूपुर,गोंडा।श्री चतुर्भुजी नाथ मंदिर ग्राम चतुर्भुजवा,महादेवा कला चल रही श्री शिवमहापुराण कथा के अंतिम दिन डॉ रामविलास दास वेदांती जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव की बरात पार्वती के मायके पहुंची तो सभी पहले तो प्रसन्न हुए क्योंकि पहले भगवान विष्णु के नेतृत्व में देवतागण चल रहे थे। लेकिन उसके पीछे भगवान शंकर बैल पर बैठ कर सर्प लपेटकर भस्म लगाकर चार भुजाएं धारण कर जब पहुंचे तो उनको देखकर भगवती पार्वती की मां मैना बेहोश हो गयीं।

उन्होंने नारद मुनि से कहा कि हे मुनीश्वर हमने आपका क्या बिगाड़ा था जो कि आपने हमारी बेटी को ऐसी शिक्षा दी और बेटी की हजारों वर्षों की तपस्या बर्बाद हो गयी।उन्होंने बताया कि मुनि ने सती के इतिहास को बताने के साथ बताया कि वही सती त्रेतायुग में भगवती पार्वती के रूप में हिमांचल के यहां जन्म ली और इसको समझाने के पश्चात शिव पार्वती का सुन्दर वेद मंत्रों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ। महा यज्ञ का समापन भव्य भंडारे के साथ हुआ।अंत में डॉ रामविलास दास वेदांती जी महाराज ने मन्दिर के निर्माण के प्रथम चरण में भव्य प्रवेश द्वार का शिलान्यास किया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संयोजक पीठाधीश्वर संत राघवेश दास वेदांती,भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री वैभव सिंह,संतोष घनश्याम शुक्ल,अवनीश शुक्ल आदि लोग मौजूद रहे।

