अतीक राईन
मनकापुर,गोण्डा।रमजान के पाक माह के अंतिम जुमे पर हजारों रोजेदारों ने अलविदा की नमाज अदा की। रमजान के आखिरी जुमे की नमाज में मस्जिदों में पढ़े जाने वाले खुतबे की इबारत सुन कर रोजेदारों की आंखें छलक आईं। एक बेहद मुबारक महीने की विदाई की टीस चेहरों पर भी नजर आईं। शुक्रवार को 23वीं रमजान को आखिरी जुमा था। इसे लेकर रोजेदारों और नमाजियों में खास उत्साह था। सुबह से ही लोग नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़ों में उन मस्जिदों की ओर चल पड़े जहां अलविदा की नमाज अदा होती है। यू तो ग्रामीण क्षेत्रों की तमाम मस्जिदों में नमाज़ अदा की गयी मगर मुख्य नमाज शहर में स्थित जामा मस्जिद में हुई। मस्जिद नीचे से ऊपर तक भरा हुआ था।।
मस्जिद इमाम मौलाना मुनव्वर अली ख़ान क़ादरी अपने बयान में कहा कि अलविदा जुमा की कोई खास फज़ीलत नही हैं यह बस रमज़ान मुबारक का आखिरी जुमा हैं इसलिए इसे अलविदा जुमा कहा जाता हैं इसकी नीयत जुमा का ही किया जाता हैं।वही उन्होंने कहा कि ईद में नये कपड़े न हो तो पुराना कपड़ा साफ सुथरा कर के भी ईद नमाज़ अदा कर सकते हैं। रमज़ानुल मुबारक में सबसे अहम और ख़ास है आखिरी असरे में लैलतुल कद्र जो कि हज़ार महीनों के रातों से भी अफ़जल हैं जिसमे ख़ास रब की रहमतें नाज़िल होती हैं और गुनाहों की मग़फ़िरत होती हैं।।
नमाज़ अदा करवाने के बाद मौलाना मुनव्वर अली खाँ कादरी साहब ने देश में अमन, चैन और खुशहाली की दुआ माँगी। इसी के साथ रमजान माह के आखरी जुमा(जुमातुल विदा)की नमाज़ शांतिपूर्वक अदा की गयी। इस दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजामात रहे।

