अतीक़ राईन
मनकापुर,गोण्डा। कस्बा के जामा मस्जिद में गुरुवार को रमज़ान के 16वीं तरावीह की नमाज के दौरान कुरान-ए-पाक मुकम्मल होने पर फ़ातिहा खानी का प्रोग्राम रखा गया,इस दौरान पेश इमाम मौलाना मुनव्वर अली क़ादरी तरावीह इमाम हाफ़िज़ मोहम्मद इरशाद व हाफिज़ों की गुलपोशी की गई।

मस्जिद इमाम मौलाना मुनव्वर अली क़ादरी ने कहा कि दुनिया मे कोई ऐसी किताब नही की जिसको हर कोई पढ़ रहा हो, लेकिन क़ुरान हैं जिसे हर क्षेत्र के लोग पढ़ते हैं चाहे वो डॉक्टर हो इंजीनियर या वैज्ञानिक क्योंकि रब ने क़ुरान में फरमाया हैं कि लोगों की हिदायत और शिफ़ा हासिल करने के लिए हम ने यह क़ुरान नाज़िल किया।
मौलाना मुनव्वर अली ने कहा हम लोग खुशनसीब हैं की तरावीह में अल्लाह का कलाम सुनने को मिला। यह सदका हमारे नबी का है, जिसकी वजह से अल्लाह का कलाम हमको नसीब हुआ। कहा कि तरावीह अभी खत्म नहीं हुई है, तरावीह में सिर्फ कलाम पाक मुकम्मल हुआ, तरावीह पूरे माह पढ़ना सुन्नत है, जबतक ईद का चांद नज़र न आ जाये। उन्होंने आखिरी अशरे में अल्लाह की खूब इबादत, जरूरतमंदों की जकात, फितरे से मदद की अपील की।
हाफ़िज़ मोहम्मद इरशाद ने शानदार नूरानी महफ़िल में नाते नबी पढ़ी जिस सुनकर लोग झूम उठे –
मुझ ख़ता-कार सा इंसान मदीने में रहे।
बन के सरकार का मेहमान मदीने में रहे।
याद आती है मुझे अहल-ए-मदीना की ये बात
ज़िंदा रहना हो तो इंसान मदीने में रहे।
मोज़िन नसीम खान तमाम हुफ़्फ़ाज़ ने अपने बेहतरीन कलम पेश किया।
फ़ातिहा खानी के बाद मौलाना मुनव्वर अली ने मुल्क में अमन चैन, सलामती, बीमारों को शिफा के लिए दुआ कराई।मस्जिद कमेटी ने नमाज़ियों को मिठाई वितरण किया।।

