गोण्डा।बेकसूर को अपराधी कैसे बनाया जाता है कोतवाली मनकापुर से सीखें।मामला मनकापुर गांव से जुड़ा है।यहाँ के निवासी अज़हरुदीन को 20 फरवरी की रात लगभग 7 बजे पुलिस वाले घर से सादे वर्दी में आये और उसे थाने उठा ले गये। घर वालों के पूछने पर बताया की एक महीने पहले नवाबगंज से मनकापुर इलाके में मांस की सप्लाई करने जा रहे आरोपी हलीम के फोन पर इनका फोन आया था।बस इसी को लेकर पुलिस ने 21 फरवरी की सुबह पशु क्रूरता अधिनियम की सभी धारा लगाकर ACJM 1st मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।आरोपी के अधिवक्ता सिराज मसूद सिद्दीकी ने जब अपना पक्ष रखा,तब पुलिस के सामने कोई जवाब नहीं रहा।तो फिर मजिस्ट्रेट ने इस गिरफ़्तारी को अवैध करार देते हुए ख़ारिज कर दिया,साथ ही पुरे मामले में शामिल पुलिस वालो को तलब किया।वहीं कोतवाल अरविन्द कुमार सिंह पर एक लाख का जुर्माना लगाते हुए आईओ को जाँच कर रिपोर्ट देने को कहा।साथ ही इसी मामले में मजिस्ट्रेट ने ASP को भी तलब किया।मामले को लेकर ASP और इंस्पेक्टर दोनों जिला जज के पास अपील करने पहुंचे।जहाँ जिला जज ने फटकार लगाते हुए सुनने से मना कर दिया।

पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल की छवि एक ईमानदार पुलिस अधिकारी के रूप मे होती है वहीँ मनकापुर कोतवाल पुलिस की छवि को दागदार करने पर लगा है।अधिवक्ता शीराज मकसूद सिद्दीकी ने गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए अपना पक्ष रक्खा। मामले में शामिल सभी पुलिस कर्मियों को तलब कर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए गिरफ्तारी निर्देशों का अनुपालन न करने पर जमकर फटकार लगाई और रिमांड खारिज़ कर अभियुक्त को रिहा कर दिया।रिमांड खारिज़ हो जाने पर मनकापुर कोतवाल,और Asp जबरन अभियुक्त को acjm 1 की कस्टडी से उठा कर गोण्डा जिला जज के पास ले गए जहाँ वरिष्ठ अधिवक्ता सिराज मकसूद सिद्दीकी द्वारा वहां भी अवैध गिरफ्तारी को लेकर पुरजोर विरोध किया जिसपर जिला जज ने फटकार लगाई।

