बलरामपुर।जिले की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक तहसील उतरौला,जहां शिक्षा,स्वास्थ्य और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर प्रगति देखने को मिल रही है।परिवहन की दृष्टि से आज भी यह क्षेत्र पिछड़ेपन का शिकार है। यहां का प्रमुख यातायात केंद्र उतरौला बस स्टॉप जो वर्षों से उपेक्षा और अव्यवस्था की मार झेल रहा है।
स्थानीय समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा इसे बस डिपो में तब्दील किए जाने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं।विभागीय उदासीनता के चलते यह मांग आज तक केवल कागज़ों और घोषणाओं तक ही सीमित रह गई है।
उतरौला बस स्टॉप का निर्माण तो वर्षों पहले हुआ था, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां यात्रियों को सिर्फ मायूसी ही हाथ लगती है।बस स्टॉप पर पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। यात्रियों को निजी दुकानों या आसपास की होटलों पर निर्भर रहना पड़ता है।यहां सार्वजनिक शौचालय सालों से बंद और जर्जर पड़ा है।महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थिति बड़ी असुविधा पैदा करती है।
यात्रियों को न तो बैठने के लिए बेंच मिलती है और न ही धूप-बारिश से बचने के लिए छाया। गर्मी के दिनों में घंटों खड़े रहना लोगों की मजबूरी बन जाता है।बलरामपुर में उतरौला के लोग लगातार इसे बस डिपो बनाने की मांग करते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। यही कारण है कि लखनऊ, कानपुर, दिल्ली जैसी बड़ी रूटों की सरकारी बसें यहां ठहरती तक नहीं।अधिकतर बसें श्यामा प्रसाद मुखर्जी चौराहे से सवारियां भरकर निकल जाती हैं। इसका खामियाजा महिलाओं, बुजुर्गों और छात्रों को भुगतना पड़ता है, जिन्हें मजबूर होकर सैकड़ों मीटर पैदल चलकर मुख्य चौराहे तक जाना पड़ता है।

यहां के वाशिंदों,समाजसेवियों व छात्र-छात्राओं का कहना है कि उतरौला बस स्टॉप की दुर्दशा इस क्षेत्र की बड़ी आबादी की अनदेखी है। यहां न्यूनतम सुविधाएं तक न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।लोगों का कहना है कि उतरौला बस स्टॉप को तुरंत बस डिपो का दर्जा दिया जाए।यहां पेयजल,स्वच्छ शौचालय,छाया और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
मुख्य मार्गों से गुजरने वाली सभी बसों को यहां ठहरने का निर्देश दिया जाए।जहां एक ओर सरकार गांव से शहर तक बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक परिवहन का दावा करती है, वहीं उतरौला बस स्टॉप की बदहाल स्थिति इन दावों की पोल खोलती है।बलरामपुर जैसे सीमावर्ती जिले का प्रमुख नगर होकर भी उतरौला को परिवहन सुविधाओं में हाशिये पर रखा गया है।
क्षेत्रीय लोगों व समाजसेवियों ने चेतावनी दी हैं कि यदि शीघ्र ही बस स्टॉप को डिपो घोषित कर बुनियादी सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई गईं, तो यह उपेक्षा भविष्य में जनआंदोलन का रूप ले सकती है।

