उतरौला,बलरामपुर।उतरौला तहसील क्षेत्र में खाद की किल्लत और कालाबाजारी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। आलम यह है कि बीते दिनों खाद के लिए लगी लंबी लाइन में एक किसान की मौत हो गई थी,लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक ठोस कदम नहीं उठाए हैं।

रबी और खरीफ फसलों के लिए खाद की आवश्यकता इस समय चरम पर है। इसी बीच किसान सरकारी गोदामों और सहकारी समितियों पर सुबह-सुबह पहुंच जाते हैं। लेकिन घंटों धूप में खड़े रहने झेलने के बावजूद अधिकतर किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। कतार में खड़े कई किसानों ने बताया कि जब तक उनकी बारी आती है, तब तक अधिकारी “खाद समाप्त” होने की घोषणा कर देते हैं। मजबूर होकर किसान खाली हाथ ही वापस लौटने को विवश हैं।
सूत्रों की मानें तो कई निजी खाद विक्रेताओं के यहां हजारों बोरी खाद डंप कर दी गई है। किसानों का आरोप है कि यह खाद खुले बाजार में तय कीमत से लगभग दुगने रेट पर बेची जा रही है। गरीब और छोटे किसान महंगे दाम पर खाद खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। यही कारण है कि वे सरकारी गोदामों की लाइन में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि लगातार हो रही उपेक्षा से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। एक किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा,“हम खाद के लिए लाइन में खड़े-खड़े थक जाते हैं। बारी आने पर कहते हैं कि खाद खत्म हो गया। आखिर हम किसान जाएं तो जाएं कहां? खेती समय पर नहीं होगी तो फसल बर्बाद हो जाएगी।”
बीते दिनों खाद की लाइन में धूप और गर्मी से बेहाल एक किसान की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। लेकिन अफसोस की बात है कि इसके बावजूद जिला प्रशासन और सहकारिता विभाग ने समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है, जबकि हकीकत में हालात जस के तस बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो खाद की कालाबाजारी तुरंत बंद हो सकती है। बड़े पैमाने पर डंप की गई खाद जब्ती कर किसानों में बंटवाई जा सकती है। किंतु अधिकारियों और विक्रेताओं की मिलीभगत के चलते यह गोरखधंधा धड़ल्ले से जारी है।
किसानों ने मांग की है कि गोदामों और समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए।कालाबाजारी रोकने के लिए निजी विक्रेताओं के यहां छापेमारी की जाए।दोषी अधिकारियों और विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई हो। किसानों को लाइन में लगने के बजाय पारदर्शी व्यवस्था के तहत कूपन या टोकन सिस्टम शुरू किया जाए।
कुल मिलाकर उतरौला तहसील क्षेत्र में खाद की समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही खाद की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो उनकी मेहनत और फसल दोनों पर पानी फिर जाएगा।

