पश्चिमी चंपारण।जिला में बारिश रूठा रहा फसले खराब होती रही। सावन आया और झमाझम बारिश से शराबोर कर दिया। जिम फसलों में रोक लग गया था वह फैसले भी हरी होने लगी। किसानों को उम्मीद बड़ी की साल धान की फसल अच्छी होगी। जब किसान यूरिया के लिए बाजार में आए तो उड़िया बाजार से ही गायब था। कालाबाजारी के कारण 500 से 600 रुपया बोरी यूरिया बेच रहे थे। किसान इस्कॉन फोन सहित खाद की दुकानों में मारा मारा फिर रहा है। यूरिया लेने के लिए लाइन में खड़े दो लोगों का पैर तक टूट गया एवं एक व्यक्ति अचेत भी हो गया था। किसान अपनी फसलों में जान डालने के लिए यूरिया के लिए दर दर अटकने को मजबूर है।
बता दें की खरीफ फसल धान व गन्ना फसलों में छिड़काव के लिए यूरिया विगत 20 दिनों से गायब है।चाहे बिस्कोमान भवन हो या पैक्स गोदाम सभी जगहों पर देखने के लिए एक बोरी यूरिया नहीं है। जिससे किसानों की समस्या और भी बढ़ गई है। हालाकि खासकर धान रोपनी के बाद अब सबसे बड़ी जरूरत किसानों को फसलों में यूरिया छिड़काव की जरूरत है, ऐसे में यूरिया नहीं मिलने से किसान काफी परेशान दिख रहे हैं। वहीं कुछ समर्थवान किसान महंगी कीमतों में यूरिया की खरीदारी कर अपने फसलों में यूरिया का छिड़काव कर रहे हैं। जबकि माध्यम व निर्धन किसान यूरिया की किल्लत से अपने फसलों में यूरिया छिड़काव से वंचित हैं। जिससे उनके फसलों का विकास अवरुद्ध हो गया है। इसके साथ ही फसलों में तरह तरह के रोग लगना शुरू हो गया है, जिसको देख किसान काफी परेशान दिख रहे हैं। अनार के तीन दिनों से विस्कोमान भवन में यूरिया का वितरण किया जा रहा है। किसने की सैकड़ो की संख्या में विभिन्न उमड़ रही है। भीड़ से निजात के लिए बगहा दो बीडीओ,सीओ आदि द्वारा अनुमंडल परिसर में किसानों को पर्ची काटा जा रहा है उसके बाद हाथ मिल रहा है। पर्ची के आधार पर उड़िया मैया कराया जा रहा है, भारी भीड़ उमड रही है। गौरतलब हो कि किसान यूरिया खाद को मनमाने दामों पर खरीदने के लिए मजबूर हैं। सरकारी मूल्य 266 रुपए की बजाय 500 सौ रुपए की मूल्यों पर कुछ दुकानदार अधिक दाम लेकर या यूरिया के साथ अन्य उत्पाद जबरदस्ती बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों को यूरिया खाद खरीदने जाने पर बिस्कोमान भवन व पैक्स गोदाम के संचालक के द्वारा कहा जाता है कि अभी यूरिया खाद के लिए भारी भीड़ हैं। किसानों को देखते ही देखते 20 दिनों से अधिक हो गया लेकिन अब तक किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया खाद मिलने का कोई आसार नही दिख रहा है।
बता दे कि किसान मजबूर होकर उचित मूल्य के बजाय उच्च दरों में यूरिया खाद लेना पड़ रहा हैं। कुछ किसानों का कहना है कि दुकानदारों ने दुकान में यूरिया खाद रखने के बजाए दूसरे जगहों पर छुपा कर रखा गया है। जो जांच का विषय है। दिखावे के लिए थोड़ा बहुत जल्द बाजी में बांटते हैं और शेष यूरिया खाद्य को 450 से 500 सौ रूपए में बेच दिया जाता है। किसानों का कहना है कि प्रत्येक पंचायत में कृषि पदाधिकारियों द्वारा पंचायत स्तर पर निगरानी सौंपी जाए। जिससे कालाबाजारी पर लगाम लग सकें। वही इस तरह की रवैया से अधिकारियों पर कई तरह सवाल किसानों द्वारा उठ रहा हैं। यूरिया खाद की कालाबाजारी कुछ दुकानदार यूरिया की कमी का फायदा उठाकर अधिक दामों पर बेच रहे हैं, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। दर्जनों किसानों ने कहा कि अगर सभी पैकसों में खाद उपलब्ध करा दिया जाए तो पंचायत के सभी किसानों को यूरिया उपलब्ध हो जाएगा। बता दे की दो दर्जन से अधिक पूर्वक दुकानदारों के लाइसेंस को डीएम ने रद्द कर दिया है। इन दुकानों पर खाद नहीं रहने से किसानों की ओर परेशानी बढ़ गई है। किसान बिस्कोमान भवन में रात को ही खाकर पंक्ति में खड़े हो जा रहे हैं।

