उतरौला,बलरामपुर।सरकार द्वारा गांवों के सर्वांगीण विकास के चाहे जितने भी दावे किए जाएं, लेकिन उतरौला ग्रामीण क्षेत्र के छिपिया गांव की हकीकत इन दावों को आईना दिखा रही है। यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं खासकर जलनिकासी और साफ-सफाई से वंचित है।
गांव की गलियों में न तो कोई पक्की नाली है,न ही समुचित जल निकासी की व्यवस्था।हल्की बारिश होते ही सड़कों पर जलभराव हो जाता है और कीचड़ में चलना तक मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति इतनी बदतर है कि ग्रामीणों को अपने ही घरों से बाहर निकलने के लिए पॉलिथीन या ईंटों का सहारा लेना पड़ता है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि गांव में वर्षों से कोई नाली नहीं बनी है।नतीजतन गंदा पानी घरों के आगे इकट्ठा होकर बदबू और बीमारी का स्रोत बन चुका है।जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है,जिससे डेंगू,मलेरिया जैसे मच्छर जनित रोगों का खतरा गहरा गया है।
गांव के लोगों ने बताया कि कई बार ग्राम प्रधान और स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन दिया गया,लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नालियों के अभाव में पानी घरों की दीवारों को भी नुकसान पहुंचा रहा है, जिससे लोगों की संपत्ति को भी खतरा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में तत्काल नाली निर्माण कराया जाए।नियमित साफ-सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव हो।जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।जनप्रतिनिधियों द्वारा गांव का स्थलीय निरीक्षण कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
छिपिया गांव की दुर्दशा यह बताने के लिए काफी है कि कागजों पर चाहे जितना विकास दर्शाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी दयनीय है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से ग्रामीणों का धैर्य टूटता जा रहा है। यदि जल्द ही इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य हो सकते हैं।

