इमरान अहमद
गोंडा।अवध के किसान धीरे-धीरे पारंपरिक खेती छोड़कर अब नई तकनीक अपनाकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं तो ये खबर जरूर पढ़ें। अवध के सैकड़ों किसान धान, गेहूं और बाजरा की खेती छोड़कर इन किसानों ने सब्जियों की खेती कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। ऐसा करके आप भी आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि सब्जियों की खेती के क्या तरीके और गुर हैं,जिससे आर्थिक संपन्नता आ सकती है।
वजीरगंज के किसान हो रहे मालामाल
वजीरगंज विकास खंड के क्षेत्र में खेत में लहराती सब्जी की खेती सैकड़ों परिवारों के लिए खुशहाल जीवन का मजबूत आधार बन गई है। कभी आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान अब सिजनल सब्जियों से मिली आमदनी के सहारे उन्नत एवं खुशहाल जीवन गुजार रहे हैं। सुबह से शाम तक खेत में पसीना बहाकर किसान अब आसपास के गांवों के किसानों के लिए नजीर बन गए हैं। यहां का किसान पारंपरिक धान,गेहूं,बाजरा की खेती छोड़ सब्जी की खेती पर जोर दे रहे हैं। यही वजह है कि यहां के विभिन्न गांवों में किसान सब्जी की खेती कर खुशहाल हो रहे हैं। क्षेत्र के किसानों द्वारा उत्पादित सब्जी जिले में ही नहीं दूसरे जिलों में भी भेजी जा रही है।
20 हजार रुपए की लागत में अच्छा मुनाफा
वजीरगंज विकास खंड की जमादारपुरवा, चड़ौवा, खीरीडीह, करनीपूर गांव के सैकड़ों किसानों ने सब्जी की खेती जुटे हैं। भिंडी, तरोई, लौकी, कद्दू , बैंगन, मिर्च, शलजम, करेला ,गाजर, पत्ता गोभी, फूल गोभी आदि की खेती कम जमीन और कम लागत में अधिक उत्पादन कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। सब्जी की खेती से यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। सब्जी की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि एक बीघा करेला लगाने में 20 हजार रुपये लागत लगती है। यदि फसल अच्छी तरह से तैयार हो जाती है तो अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है।
मिर्च की खेती से हो रही आय
मिर्च की खेती करने वाले किसान शिवशंकर ने बताया कि 10 बिस्वा में मिर्च की फसल लगाने के दो माह बाद से कच्ची मिर्च टूटने लगती है। छह माह तक कच्ची मिर्च टूटकर बाजार जाती है। 6 माह में 10 बिस्वा जमीन में लगी मिर्च की फसल से कम से कम 50 हजार की आमदनी हो जाती है। कच्ची मिर्च टूटने के बाद सुखा कर बेचा जाता है।
सब्जियों की आय से इनके बच्चों की अच्छी परवरिश
करैला, कद्दू, भिंडी, गोभी, टमाटर व लौकी की खेती मेहनत से करने के बाद अच्छी आमदनी देती है। जनपद के वजीरगंज विकास खंड की 40 ग्राम पंचायतों में सबसे अधिक सब्जी की खेती कोटिया व खीरीडीह गांव में की जाती है। सब्जी की खेती होने से गांव के बड़े किसानों के साथ छोटे किसान भी खुशहाल जीवन यापन कर रहे हैं। यहां के किसान अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा और अच्छी परवरिश दे रहे हैं।
कई जिलों में वजीरगंज सब्जियों की
मांग
इन गांवों से उत्पादित सब्जी मनकापुर सब्जी मंडी व गोंडा सब्जी मंडी समेत दूसरे जिलों में भी बेची जाती है। इन गांवों की सब्जी की खेती देखने के लिए लोग बाहर से भी आते हैं। यही नहीं इन किसानों को देखकर दूसरे गांव के लोग भी सब्जी की खेती करने में लगे हैं। सब्जी की खेती करने वाले किसान कोटिया गांव निवासी राम नरायण बताते हैं कि बिना सरकारी सहायता के गांव के किसान कड़ी मेहनत करके सब्जी की फसल का उत्पादन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सब्जी की खेती के लिए किसानों को बढ़ावा दे तो किसानों की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो जाए और किसान अधिक खुशहाल हो जाए।
सरकारी योजना का नहीं मिला लाभ
करनीपुर गांव निवासी किसान राम धीरज सब्जी की खेती करते हैं। उन्हें अभी तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ उन्हें नहीं मिला है खेती के समय क्षेत्र के कई किसानों को पैसे के अभाव में खाद व बीज उधार लेना पड़ता है। माल बिकने पर उन्हें दिया जाता है। इस गांव से कस्बे की सब्जी मंडी नजदीक होने के चलते किसानों को सब्जी बेचने के लिए कोई समस्या नहीं आती है। किसान रामदेव, भारत मौर्य, राम किशोर, हनुमान, छोटू, लाल बहादुर, मुन्नू निवासी करनीपुर करैला, बैगन, पालक, मटर, गोभी, टमाटर, लौकी के साथ आलू की बड़े पैमाने पर खेती करते हैं।

