संवाददाता गंगेश पाठक
अमेठी।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार के नौवें बजट को बिना विजन वाला और दिशाहीन बताया है। उन्होंने कहा कि इस बजट में कोई रोडमैप नहीं है कि उत्तर प्रदेश को किस दिशा में ले जाना है। यह भाजपा के घोषणा पत्र से भी मेल नहीं खाता और इसमें किसानों, नौजवानों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है।
समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट केवल बड़ा ढोल है, जिसकी आवाज तो बहुत है, लेकिन अंदर से यह पूरी तरह खाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट देखकर किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है, महिलाओं की घर चलाने की चिंता बढ़ गई है और बेरोजगारों के लिए इसमें कोई राहत नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के विधायकों और मंत्रियों के लिए भी यह बजट चिंता का विषय है क्योंकि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर अब उन्हें जनता के सवालों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में महंगाई और बेरोजगारी कम करने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है।
भाजपा के संकल्प पत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बजट में मुफ्त सिंचाई बिजली, 25 हजार करोड़ के एग्रो इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, छात्रों को लैपटॉप जैसी घोषणाओं का कोई उल्लेख नहीं है। बुंदेलखंड का मूंगफली किसान बर्बाद हो गया, लेकिन सरकार ने उसकी कोई सुध नहीं ली। फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की बात भी हवा में रह गई।
गन्ना किसानों की दुर्दशा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया और बकाए का भुगतान अब तक नहीं किया गया। सरकार ने एफपीओ बनाने और किसानों को 18 लाख रुपये की मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी अधूरा रह गया।
शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों ने शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया है। विश्वविद्यालयों को पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा, जिससे वे संकट में हैं। यूपी में हजारों प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग खुद इलाज की जरूरत में है। गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रहीं, जबकि सरकार चाहती है कि लोग निजी अस्पतालों का सहारा लें।
वित्त मंत्री के गृह क्षेत्र में भी मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज और एम्स में कैंसर का इलाज उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को लखनऊ आना पड़ता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि समाजवादी सरकार में बनाए गए कैंसर संस्थान का नाम बदल दिया गया, लेकिन उसे पर्याप्त बजट नहीं दिया जा रहा।
अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि यह बजट जनता के साथ धोखा है। बुनकरों, किसानों, युवाओं, व्यापारियों और आम लोगों को इसमें कोई राहत नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार अब वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की बात भी नहीं कर रही, क्योंकि मौजूदा विकास दर के हिसाब से यह लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो सकता।

