इमरान अहमद
गोंडा।लगभग एक साल पहले नगर पंचायत का दर्जा पाने वाले धानेपुर में ईओ की कुर्सी पर छः महीने भी टिक पाना मुश्किल क्यों है। यह प्रश्न लगातार हो रहे तबादले की वजह से अब लोगों के जेहन में उठने लगा है।
वर्ष 2023 के अंत में धानेपुर नगर पंचायत की सरकार बनने के बाद इसे आदर्श और आकांक्षी नगर पंचायत बनाया गया। शहरी तौर पर विकसित करने के लिए नवगठित नगर पंचायत को कई बड़ी सौगातें सरकार ने दीं। सीवर लाइन और वाटर रिफाइंड प्लांट, पार्क, सहित सारी सुविधाएं मुहैया कराने की योजनाओं को स्वीकृती मिली। ग्राम पंचायत से नगर पंचायत तक के सफर में सरकारी कामकाज काफी प्रभावित हुआ, जन्म, मृत्यु प्रमाणपत्र, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन से लेकर हर वो ब्यवस्था जो सीधे आमजन से जुड़ी रही है। उन ब्यवस्थाओं का सुचारू संचालन स्वाभाविक रूप से बाधित रहा।
नगर पंचायत कार्यालय भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन प्रगति की गति देख कर तो यही कहा जा सकता है। की आने वाले नये कार्यकाल में ही मूलभूत सुविधाएं जो प्रतीक्षारत है, वे क्रियान्वित हो पाएंगी।
करोड़ों रुपयों से होने वाले विकास कार्यों को धरातल पर लाने के इस उहापोह में एक्जीक्यूटिव आफिसर्स का बार बार तबादला कुछ और ही इशारा करता है। अब आलम यह है की ईओ की कुर्सी पर छः महीने भी बैठ पाना मुश्किल हो जाता है। माना जा रहा है की नगर पंचायत अध्यक्षा उनके प्रतिनिधि और यहां के जन प्रतिनिधियों के बीच सामंजस्य न होना इन तबादलो का कारण बन रहा है। कराये जाने वाले विकास कार्यों का आलम ये है की तीन महीने से चार सौ मीटर इंटरलाकिंग का काम पूरा नही कराया जा सका। जबकि सड़क किनारे चल रहे कार्य की वजह से कई बार दुर्घटना भी हुई लेकिन काम में तेजी नही देखी गयी। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि भारत भूषण वर्मा ने बताया की अभी संसाधनों का अभाव है,जिन्हें जुटाया जा रहा है।

