गोण्डा।जिले की सड़कों पर वैशाली ट्रेवल्स की बस अब डग्गामार वाहन बन गई है।प्रशासन लाचार हैं। वैशाली ट्रेवल्स इन दिनों सड़कों पर ही बस स्टैंड बना लिया हैं। यही नहीं यह बसें काफी मात्रा में लगेज लादकर यात्रियों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। इस ओर न पुलिस और न ही परिवहन विभाग विभाग ध्यान दें रहा है। जिले से महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ, पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, सहित लगभग एक दर्जन राज्यों के लिये सैकड़ों क़ी संख्या में बसों का संचालन होता है। कमाई के लालच में बस आपरेटर लगेज की भी बुकिंग कर रहे हैं। हालात यह है कि क्षमता से ज्यादा वजन बसों पर डाला जा रहा है। अब इन बसों को लोडिंग वाहन बनाम ट्रक बना दिया है। यहां तक कि डिक्की में पार्सल लादने के साथ ही सीटों के नीचे भी लगेज रखकर ढोया जा रहा है। देखा जाए तो नियमानुसार, यात्री का सामान ही बसों में ले जाया जा सकता है। बावजूद इसके, ट्रेवल्स कंपनियां कमाई के चक्कर में परिवहन विभाग के नियम कानूनों को तार-तार करते देखे जाते हैं।
इन बसों का संचालन लोडिंग के तरीके किया जाता है
इन दिनों वैशाली ट्रेवल्स बसों का संचालन करने वाले चालकों व कंडक्टरो ने लोडिंग वाहनों की तर्ज पर कार्य कर रहे हैं। यात्रियों की सुविधाओं और परेशानी से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। जिस तरह ट्रांसपोर्ट आफिस में पार्सल की बुकिंग होती है, उसी तरह बस बुकिंग आफिस से लगेज की बुकिंग की जा रही है। ट्रेवल्स एजेंसियों के दफ्तरों के बाहर भारी लगेज रखे देखे जा सकते हैं। बावजूद इसके, बस चलने से पहले ही कर्मचारी लगेज लादना शुरू कर देते हैं।
एक-दूसरे पर ढेलते हैं अपनी जिम्मेदारी
बस आपरेटरों की मनमानी पर अंकुश लगाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी चंद लाभ के लिए नहीं समझते । विभागीय नियम टूटने पर पुलिस व परिवहन दोनों विभाग को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। लेकिन ये अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर ढेल देते हैं। जब कभी कोई भीषण हादसा होता है तो हर बार जिम्मेदार कार्रवाई करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन सड़को पर दिखाई नहीं देता।
हादसों के बाद भी नहीं जागते जिम्मेदार
सड़कों पर आए दिन ट्रेवल्स की बसों से हादसे होते रहते हैं। कई लोग अकाल मौत के शिकार होते हैं और की घायल हो जाते हैं। जब कभी कोई हादसा होता है तो परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ ही पुलिस विभाग कुछ दिन तो सख्ती करता है, लेकिन फिर उसे भुला दिया जाता है।
चंद पैसों की लालच में कर रहे है खिलवाड़
बसों से लगेज भेजना सस्ता पड़ता है, किराना, इलेक्ट्रानिक्स, कपड़ा, आटो पार्ट्स, मशीनें आदि सामान बसों से ही लाया ले जाया जाता है। यात्रियों से किराए लेने के अलावा बस आपरेटर को लगेज से अतिरिक्त कमाई होती है। इसी कमाई के लालच में अब आपरेटर यात्रियों की जान से खिलवाड़ करते हैं।

