नसों में ब्लाकेज लकवा,हार्ट अटैक,कैंसर व पेट संबंधी घातक बीमारियों का रहता है खतरा
काला और गाढ़ा तेल लोडेंसिटी लीपोप्रोटीन यानि बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है
मुश्ताक अहमद
गोंडा।ठेले पर तले जा रहे खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं करने जा रहे हैं। सावधान हो जाइए बाहर दुकानों, ठेलियों में समोसे, पकौड़ी, टिकिया खानें से पहले कड़ाही में पड़े तेल को देख लें। कहीं ये दुकानदार बार-बार बिना तेल बदले काले पड़े तेलों से तो नहीं बना रहे हैं। यदि ऐसा है तो जानलेवा बीमारी कैंसर व अन्य रोगों के शिकार हो सकते हैं।
अक्सर देखा जा सकता है कि भूख लगने पर लोग बाहर होटलों, ढाबों व सड़क किनारे लगी ठेलियों से टिकिया, समोसे, कचौड़ियों का जायका लेने लगते हैं। यह जानलेवा साबित हो सकता है। काली पड़ चुकी व कार्बन से मोटी कड़ाही का काला पड़ा तेल आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे घटिया काले तेल के इस्तेमाल से बनी खाद्य सामग्रियों से नसों में ब्लाकेज, हार्ट अटैक, कैंसर, फैटी लीवर व पेट संबंधी अनेक घातक बीमारियां हो रही है। बाहर की अधिक चीजों के खाने से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता भी घटती जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि एक ही तेल को गर्म कर बार-बार उसमें खाने की चीजों को तला जा रहा है। गाढ़ा काला तेल होने के बाद उसे फेंका नहीं जाता,उसमें उल्टा नया तेल डालकर बनाने लगते हैं।
खून को कर देता है गाढ़ा
चिकित्सक डा० रियाजुद्दीन कहते हैं कि एक ही तेल से बार-बार खाद्य सामग्री तैयार करने से तेल में फ्री रेडिकल्स बनने लगता है। जिससे तेल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा कम होने लगती है। इससे भारी नुक़सान है। ये ब्लड को गाढ़ा बना देता है। जिससे सांस लेने में तकलीफ़ हो सकती है। इससे हार्ट अटैक और कैंसर जैसी बीमारी की आशंका बढ़ जाती है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेहरा बाजार के चिकित्सक डा० जाकिर हुसैन कहते हैं कि तेल को दुबारा गर्म करने से वह कार्सिनोजेनिक हो जाता है। कार्सिनोजोन ऐसा तत्व है जो कैंसर का कारण बनता है। तेल को बार-बार गर्म किया जाता है तो उसमें एल्डिहाइड (जहरीले तत्व) पैदा हो जाते हैं। यदि कोई उस तेल में बने खाने को खाता है तो उसके शरीर में टांक्सिंस पहुंच जाते हैं, जो शरीर में नुकसान पहुंचाने का कार्य करते हैं।
खतरनाक है काला गाढ़ा तेल
चिकित्सकों की मानें तो बार-बार एक ही तेल के इस्तेमाल से उसमें फ्री रेडिकल्स बनने लगता है, जो कैंसर और अल्जाइमर जैसी जानलेवा बीमारियों को दावत देता है। वहीं तेल को बार-बार गर्म करने से उसकी खुशबू के साथ-साथ उसका असर खत्म हो जाता है। और तेल में फैट जमने लगता है और तेल का रंग काला पड़ने लगता है। जले हुए तेल से बने खाने से फैट चिपककर स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। यह तेल शरीर में लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानि बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। फैट से मोटापे का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। जिससे अपच व पेट दर्द जैसी समस्या हो जाती है। जले हुए तेल का सेवन करने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा खत्म होने लगती है जिससे त्वचा में भी रोग होने लगता है।

