बूढ़े मां-बाप पोते व पोतियों को घर में देख खुशी से हैं निहाल
मुश्ताक अहमद
गोंडा। ढोलक और झाल पर गाए जाने वाले होली गीत के पुकार परदेशियों को अपने गांव वापस खींच ही लाती है। वे चाहे जहां भी हों, होली में अपने गांव आने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते। होली आ गई तो गांव की गलियां भी परदेशियों और उनके बच्चों से गुलजार हो गई है। घरों में महीनों से बंद पड़े ताले खुल चुके हैं। आंगन में उग आई घास को साफ कर उसे गोबर और मिट्टी से लिपा जा रहा है। दीवारों पर उगे दरख्तों को उखाड़ उसकी मरम्मत की जा रही है। घर के अंदर साफ-सफाई चल रही है तो बच्चों की धमाचौकड़ी जारी है। महिलाओं की हंसी ठिठोली भी रुकने का नाम नहीं ले रही है। इसके साथ होली की चुहलबाज़ी भी जारी है।

बूढ़ी मां और बाप के अलावा नजदीकी सगे संबंधियों के लिए परदेशी बाबू कुछ न कुछ लेकर आए हैं। मां अपने लिए आई सूती साड़ी को निहार रही है तो पिता को बेटे द्वारा लाया गया धोती और कुर्ता भा रहा है। फैक्ट्रियों में दिन-रात हाड़ तोड़ मेहनत कर जमा की गई पूंजी से घर को दुरुस्त करने का प्लान चल रहा है, तो गांव के अन्य युवकों को भी अपने साथ ले जाने की बात हो रही है। पिछले तीन दिनों से गांवों में फगुआ गीतों में गर्माहट आ गई है।
वजीरगंज ब्लाक के टनटनीडीहा गांव के राम औतार काफी दिनों बाद परिवार संग गांव लौटे हैं। उन्होंने कहा कि अब गांव में कुछ दिनों तक आराम करेंगे। पुराने दोस्तों के साथ महफ़िल जमेगी। होली गीत गाएंगे और वजीरगंज व गोंडा घूमेंगे। वहीं चड़ौवा के रजत कहते हैं कि गांव आने का प्लान बनाना ही मन को प्रफुल्लित कर देता है। अपनी मिट्टी की मोह ही कुछ अलग है। ऐसा लगता है कि अपने गांव में हम सारी विध्न बाधाओं से दूर हैं।

वहीं मनकापुर के कोल्हारगाव में धूमधाम से होली का पर्व मनाया गया। सपा नेता सिद्धार्थ सिँह ने बच्चों, नौजवानों के साथ जमकर होली खेली।

