इमरान अहमद
गोंडा।आज के इस भागम भाग युग में खुद समाज और परिवार के लिए फुर्सत बहुत कम मिलती है। ऐसे में रसूलपुर गांव के प्रधान का परिंदों के लिए व्यवस्था करना पर्यावरण प्रेम का संदेश देता हैं। प्रवासी पक्षी और स्थानीय पक्षियों को अब बमुश्किल जगह मिल रही है। बेजुबानों से नफरत करने वालों के बीच कुछ ऐसे भी लोग हैं जो न केवल उनका दुख दर्द समझते हैं बल्कि उनके संरक्षण के लिए अपनी मेहनत की कमाई खर्च करने से भी पीछे नहीं हटते। ऐसे ही लोगों में हामिद अली उर्फ बिल्लू भी है। जो इन बेजुबान जीवों से इंसानियत का रिश्ता बनाए हुए हैं। पक्षियों से उनका रिश्ता इस कदर गहरा है कि आज उन्हें पक्षी मित्र के रुप में जाना जाता है।

दोस्त से मिली प्रेरणा
हामिद अली इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की और बंधवा में ईंट भट्ठे का व्यवसाय शुरू किया। लेकिन उनकी इस पहचान से उनके जानने वाले लोग ही वाकिफ हैं। बाकी हर किसी के लिए वे परिंदों के मित्र हैं। हामिद अली बताते हैं कि दिल्ली के कोरोल बाग में अपने दोस्त के यहां जाते थे। यहां परिंदों की बाजार लगती थी। विभिन्न प्रजातियों के परिंदों को देखने के बाद,परिंदों के बीच रहने का शौक लग गया।
खुद की तरह परिंदों का भी बनाया आशियाना
हामिद अली ने कबूतरों के लिए अपने दफ्तर के बगल ईंट से दीवाल उठाकर ऊपर टीन रखा, पंखे और लाइट का पुख्ता इंतजाम कर परिंदों के अनुकूल बनाया है। उनके भोजन और पानी के लिए खास तरह के पात्र भी रखे हैं। 45 साल के सफर में इसी तरह के छोटे- बड़े प्रयासों से वे अबतक चार दर्जन से अधिक विभिन्न प्रजातियों के कबूतरों को पाल रखा है। कबूतरों के अलावा बिल्ली और कुत्तों को भी संरक्षण दे रहे हैं।
दर्जनों परिंदों और जानवरों की बचाई जान
हामिद अली जैसे लोग वाकई अनमोल हैं, जो अपना हर दिन परिंदों के साथ बिता रहे हैं। घायल परिंदों का इलाज कराकर मुक्त करना इनकी दिनचर्या में शामिल है। तोता, गिलहरी, कौवा समेत एक दर्जन से अधिक परिंदों का जीवनदान दे चुके हैं। इसके अलावा बीमार कुत्तों और बिल्लियों का भी इलाज करा चुके हैं। यही नहीं लावारिस मौत मरने वाले परिंदों और जानवरों का अंतिम संस्कार भी करते हैं। उनके इन कार्यों में बेटा शमशाद बराबर साथ देता हैं। बाप- बेटों को जितनी हमदर्दी इंसानों से है उतनी ही इन परिंदों से।
सीजनल फलों का इंतजाम
हामिद अली द्वारा परिंदों के लिए बनाए गये आशियाने में आधा दर्जन से अधिक कबूतर विदेशी हैं। जिनके भोजन के लिए सीजन के सारे फल और साग,सब्जियां भी दी जाती है। समय-समय पर उनका हेल्थ चेकअप भी होता है ताकि सभी स्वस्थ बने रहें।
परिंदे हैं सुखद जीवन का हिस्सा
बकौल हामिद अली परिंंदे हमारे सुखद जीवन का हिस्सा हैं। इंसानों को चाहिए कि अपने घरों में परिंदों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करें,बदलें में परिंदे उन हानिकारक बैक्टीरियों और वायरस को खाते हैं।जो हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है।यदि हम इन परिंदों को अपने परिवेश से निकाल देंगे,तो यह मानव जाति के लिए गंभीर खतरा है।

