यूपी लाइव टाइम पड़ताल:
मुश्ताक अहमद
गोंडा।यहां अंवारा जानवर किसान और राहगीर ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन के लिए भी मुसीबत बन बैठे हैं। जिले में खोले गए गोशालाओं में इन्हें आश्रय नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि गोशालाओं से अधिक सड़कों व खेतों में छुट्टा अंवारा मवेशी देखे जाते हैं। ये अंवारा पशु किसानों की हरी भरी फसल को तैयार होने से पहले ही चौपट कर देते हैं। यही ही नहीं ये अंवारा पशु आए दिन किसानों व राहगीरों को पटक कर घायल कर देते हैं। अबतक छुट्टा मवेशियों के हमले में कईयों की जान भी जा चुकी है।
इन्हें नहीं मिल रहा ठौर
जिला प्रशासन छुट्टा मवेशियों को पकड़ कर उन्हें गोशालाओं तक पहुंचाने का रिस्क नहीं लेना चाहते। इसके लिए प्रशासन ने कोई टीम नहीं बना रखी है। जानवरों को पकड़ने के लिए ठोस इंतजाम न होना ही बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है। ऐसे में गोशालाओं तक न पहुंचने की वजह से अंवारा पशु सड़क व खेत खलिहानों में घूमते मिलते हैं।
हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं स्थानीय निकाय
नगर पालिकाएं व नगर पंचायतें इस मसले पर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। अंवारा पशुओं को शहर की सड़क व गलियों से भगाने के लिए निकाय के पास भी कोई टीम नहीं है। मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में गोशाला नहीं बनी है। बल्कि पशुपालन विभाग के ही मुर्गी फार्म को अपना गोआश्रय स्थल घोषित कर दिया है। नगर क्षेत्र में मवेशियों को सड़कों पर टहलते देखा जा सकता है। नगर क्षेत्र में इस दिशा में ठोस कदम न उठाए जाने को इसका कारण माना जा रहा है।
जनपद में तीन विभागों ने मिलकर खोले 45 केन्द्र
जनपद में अबतक 34 अस्थाई गोआश्रय स्थल खोले गए हैं। जिसमें 3251 जानवरों को रखा गया है। जिला पंचायत ने अपने आठ कांजी हाउस में 66 मवेशियों को रखा गया है। पशुपालन विभाग ने दो वृहद गोसंरक्षण केंद्र बनाया है। जिसमें से एक एक वृहद गो संरक्षण केंद्र 1 करोड़ 20 लाख रुपए की लागत से विकास खंड झंझरी के काजीदेवर में तैयार किया गया है। दूसरा वृहद गो संरक्षण केंद्र मनकापुर विकास खंड की बैरीपुर रामनाथ में है। कान्हा योजना के तहत नगर पंचायत खरगूपुर ने 60 लाख रुपए के लागत से एक गो आश्रय स्थल बनाया गया है। जहां पर 85 मवेशी रखाए गये हैं।
ये गोआश्रय केन्द्र बना रोल माडल
बेलसर ब्लाक का गोआश्रय स्थल बदलेपुर जिले के अन्य गो आश्रय केन्द्रों के लिए रोल मॉडल बना हुआ है। यहां पर चारा पानी आदि के लिए बेहतर प्रवंध है। गोआश्रय स्थल स्वावलंबी बन रहा है यहां पर गोशाला संचालन के लिए वर्मी कंपोस्ट खाद बनकर बेंचने व इससे होने वाली आय को स्वावलंबन का आधार बनाया जा रहा है।
घोटाले ने तोड़ी योजना की कमर
घोटाले ने गो आश्रय केन्द्र संचालन की योजना का कमर तोड़ने का काम किया है। कटरा बाजार में मनरेगा से गो आश्रय केन्द्र बनाया जा रहा था। जिसमें घोटाला सामने आ चुका है। निर्माण की गुणवत्ता भी निम्न स्तर की पाई गई थी।
“जिले के गो आश्रय केन्द्र स्वावलंबी बनाए जा रहे हैं। उनके स्वावलंबन तक मनरेगा समेत पशुपालन व पंचायत विभाग जिम्मेदारियां संभाल रहा है। ग्राम पंचायतें भी इस कार्य में लगी हुई हैं। गोआश्रय केन्द्रों के नियमित निरीक्षण अफसर कर रहे हैं।
अंकिता जैन
मुख्य विकास अधिकारी
गोंडा।

