मोहम्मद उमर उर्फ समीर
बहराइच।जिले के सुजौली क्षेत्र में स्थित गुप्तापुरवा और तुलसीपुरवा गांव को घाघरा नदी की तांडव ने अस्तित्व पर कालिख पोतने को आतुर है। घाघरा नदी की लहरें और नौ गाँवों को लीलने के लिए बेताब दिख रहीं हैं। घाघरा की कटान से परेशान ग्रामीण अब अपना घर अपने हाथों से ही उजाड़कर पलायन करने को विवश हैं।

घाघरा नदी की कहर मिहीपुरवा तहसील की सुजौली क्षेत्र के गाँवों में थम नहीं रहा है। घाघरा नदी की लहरों ने थाना सुजौली क्षेत्र में स्थित गुप्तापुरवा और तुलसीपुरवा को लील लिया है। अब नदी की लहरें सुजौली, बड़खड़िया, चहलवा और जंगल गुलरिया गांव को लीलने के लिए बेताब दिख रही हैं। पहले घाघरा की बाढ़ और अब घाघरा की कटान के विकराल रूप से लोग परेशान हैं। लगभग 35 हजार की आबादी प्रभावित है।
घाघरा की लहरों ने गुप्तापुरवा और तुलसीपुरवा गांव का अस्तित्व पर कालिख पोतने के बाद अब तक दो दर्जन से अधिक घर और सैकड़ों बीघा जमीन को डकार लिया है। आलम यह है की जिनका घर कटान से अभी बचा है वह अपना घर अपने हाथों से उजाड़कर पलायन करने पर मजबूर है
प्रधान प्रतिनिधि जंगल गुलरिहा शिवकुमार निषाद ने जिलाधिकारी कार्यालय में जाकर ज्ञापन दिया है। दिए गए ज्ञापन में लिखा है कि लगातार हो रही कटान के चलते उपजाऊ भूमि के साथ घर भी घाघरा नदी में समाहित हो रहे हैं।
नदी की कटान से ग्रामीण परेशान
प्रधान प्रतिनिधि शिवकुमार निशाद ने कहा कि जंगल गुलरिया ग्राम पंचायत के 9 मजरे में घाघरा की कटान जारी है। अबतक दो दर्जन घर व सैकड़ों बीघा जमीन व खड़ी फसलों को घाघरा की लहरें डकार चुकी है।
लालमुनि,हरेंद्र,बब्बन,शुभराती,काबरुन्निशा,गंगादास,राजेश,रामशंकर,लल्लन,जीतेन्द्र,रामजीत,प्रभु,रामशंकर मौर्य आदि किसानों के घर घाघरा नदी में समाहित हो चुके हैं।

