गोंडा।शिक्षा महिलाओं को जीवन के मार्ग को चुनने का अधिकार देने का पहला कदम है जिस पर वह आगे बढ़ती है। एक शिक्षित महिला में कौशल, सूचना, प्रतिभा और आत्मविश्वास होता है जो उसे एक बेहतर मां, कर्मचारी और देश का निवासी बनाती है। महिलाएं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। पुरुष और महिलाएं सिक्के के दो पहलूओं की तरह हैं और उन्हें देश के विकास में योगदान करने के समान अवसर की आवश्यकता होती है। उक्त विचार भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य घनश्याम जायसवाल ने कर्नलगंज निवासी शिवप्रसाद जायसवाल की पुत्री रोली जायसवाल को सम्मानित करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। रोली का अभी हाल ही में लेखपाल पद पर चयन हुआ है।

श्री जायसवाल ने बताया कि किसी भी राष्ट्र का सुधार लड़कियों की शिक्षा पर निर्भर करता है। इसलिए लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।शिक्षा एक लड़की को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने में मदद करती है ताकि वह अपने अधिकारों और महिलाओं के सशक्तिकरण को पहचान सके जिससे उसे लिंग असमानता की समस्या से लड़ने में मदद मिले। अब महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रही हैं । लेकिन फिर भी कुछ ऐसे लोग हैं जो लड़कियों की शिक्षा का विरोध करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि लड़की का काम घर तक सीमित है और उन्हें लगता है कि लड़कियों की शिक्षा पर खर्च करना पैसा व्यर्थ करना है। यह विचार गलत है क्योंकि लड़कियों की शिक्षा समाज में बदलाव ला सकती है।
एक आदमी को शिक्षित करके हम केवल एक व्यक्ति को शिक्षित करते हैं लेकिन अगर हम एक महिला को शिक्षित करते हैं तो हम पूरे परिवार को शिक्षित करते हैं। यह लड़कियों की शिक्षा का महत्व दर्शाता है। यह सच है कि एक महिला अपने बच्चों की पहली शिक्षक है और उन्हें मां की गोद में अपना पहला सबक मिलता है। इसलिए अगर एक मां अच्छी तरह से शिक्षित होती है तो वह अपने बच्चों के भविष्य को सही आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। महिलाओं को पुरुषों की तरह शिक्षा में बराबर मौका दिया जाना चाहिए और उन्हें किसी भी विकास के अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। एक जानकार महिला अपने पूरे परिवार को और पूरे देश को शिक्षित कर सकती है। भाजपा जिला कार्य समिति सदस्य घनश्याम जायसवाल ने राजस्व लेखपाल पद पर चयनित रोली जायसवाल को अंगवस्त और गीता पुस्तक भेंट कर उनका स्वागत किया।

