इक़बाल शाह
गोण्डा।जिले में बर्न स्पेशलिस्ट सर्जन की उपलब्धता ने आग से जली हुई बच्ची के चेहरे पर मुस्कान ला दी। अज्ञात कारणों से आग से जली बच्ची के इलाज के लिए परिजन 6 माह तक इधर उधर भटकते रहे। लेकिन मंहगे इलाज के चलते बच्ची में उत्पन्न हुई पोस्ट बर्न कार्नट्रेक्चर नाम की बिमारी ठीक न हो सकी। लेकिन जिले में मौजूद बर्न स्पेशलिस्ट सर्जन द्वारा बच्ची का सफल ऑपरेशन कर उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाई गई।

जिले में एक निजी अस्पताल श्री कृष्ण कुमार मौर्य मेमोरियल लाइफ केयर हास्पिटल में एक बड़ी कामयाबी सामने आई है। जहां पोस्ट बर्न कार्नट्रेक्चर नाम की बिमारी ( जलने के बाद शरीर पर उत्पन्न होने वाली विकृति ) का सफल ऑपरेशन किया गया। करनैलगंज के हलधरमऊ क्षेत्र से आए सहजाद मोहम्मद ने बताया कि उसकी 10 साल की बच्ची जूही लगभग 8 माह पहले आग से उसका हाथ जल गया था। उस वक्त इधरउधर इलाज कराया था। मासूम बच्ची ठीक तो हो गई। लेकिन जलने के निशान व उसके हाथ की उंगलियां टेढ़ी होकर चिपक गई। उसका कहना है कि बच्ची के इलाज के लिए वह लखनऊ गया। जहां उसके इलाज के लिए अधिक खर्च आ रहा था। गरीबी के चलते परिजन मायूस होकर घर लौट आए। तभी उन्होंने जिले के एक निजी हास्पिटल श्री कृष्ण कुमार मौर मेमोरियल लाइफ केयर हास्पिटल में बच्ची को दिखाया। जहां मौजूद बर्न स्पेशलिस्ट सर्जन डा. सुधीर कुमार मौर्या ने बच्ची की हालत को देख उसका सफल ऑपरेशन कर उसके चेहरे पर मुस्कान लौटाई। डा. सुधीर कुमार मौर्या ने बताया कि जलने के बाद अक्सर शरीर का वह भाग जहां जला हुआ होता है। जिसकी खाल एक दूसरे से चिपक जाती है। जिसे चिकित्सीय भाषा में पोस्ट बर्न कार्नट्रेक्चर बोला जाता है। जिसका समुचित इलाज न किया जाए तो वह उस हिस्से बेकार कर देती है। जिससे मरीज को कई असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।

