मुश्ताक अहमद
गोंडा।पूर्वांचल के किसानों द्वारा पैदा की जा रही काली मिर्च का तड़का सूबे के कई जनपदों के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल की रसोइयों में तड़का लगता है। लोगों का स्वाद तो बढ़ाता ही है साथ ही साथ किसानों का अच्छा लाभ भी मिल रहा हैं। गोंडा जिले का वजीरगंज मिर्च मंडी में शुमार है। यहां पर सीजन में बाहर से भी व्यापारी आते हैं।

वजीरगंज में लगती है सब्जी मंडी
वजीरगंज के किसानों का रुझान अब साग भाजी के साथ मिर्च खेती की ओर ज्यादा बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों किसान गन्ना, मक्का और तंबाकू की खेती छोड़कर मिर्च की खेती करने लगे हैं। बीते इन पांच वर्षो में मिर्च की पैदावार इस कदर बढ़ी, कि वजीरगंज सब्जी के साथ ही मिर्च मंडी बन गई है। वजीरगंज ब्लाक की ग्राम पंचायत रायपुर, नैपुर, रमचेरापुर, ढोढ़िया पारा, चड़ौवा, अजबनगगर, चंदहा और जमादार पुरवा, रसूलपुर आदि जगहों से मिर्च खरीदकर वजीरगंज में थोक व्यापारियों को बेची जाती है। यहां बाहर से व्यापारी आकर मिर्च खरीदकर पड़ोसी देश नेपाल व प्रदेश के आसपास जिलों में विक्री के लिए भेजते हैं।
पारंपरिक खेती से हो रहा मोहभंग
यहां के इलाकाई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यान की खेती में ज्यादा रुचि ले रहे हैं। इसमें काली मिर्च, हरी मिर्च व शिमला मिर्च शामिल है। कृषि रक्षा इकाई केन्द्र वजीरगंज में तैनात सराफत उल्ला ने बताया कि पहले मिर्च की खेती करीब दस से बीस एकड़ में होती थी। लेकिन अब इसका क्षेत्रफल बढ़कर लगभग डेढ़ सौ एकड़ में हो गया। जिले में काली मिर्च उत्पादन में वजीरगंज ब्लाक सबसे अग्रणी है। यहां पर सीजन में कई टन मिर्च का व्यापार देश के कई राज्यों के साथ पड़ोसी देश नेपाल में होता है।
जिले भर के किसान आते हैं मिर्च बेचने
मिर्च के व्यापारी साकिर बताते हैं कि वह लखनऊ की मंडी में पहले मिर्च का व्यापार करते थे। लेकिन वहां मंडी में मिर्च बहुत कम आती है। वजीरगंज मिर्च मंडी के बारे में सुना तो यहां से कारोबार शुरू किया। यहां वजीरगंज के किसान ही नहीं बल्कि पूरे जिले के किसान मिर्च लेकर आते हैं। यहां की मिर्च की गुणवत्ता और उसका कड़वापन इतना होता है कि बाहर की मंडियों में वजीरगंज की मिर्च की ज्यादा मांग रहती है। यहां का तापमान मिर्च की खेती के लिए बहुत ही बेहतर है। जिससे उत्पादन के अन्य जिलों की अपेक्षा यहां बेहतर होता है। किसानों को दोहरी फसल लेने में आसानी होती है। किसानों का यह भी कहना है कि यदि मौसम साथ दे और फसल अच्छी हो जाए तो मुनाफा अधिक हो जाता है।
बाहरी व्यापारी देते हैं अच्छा भाव
खीरीडीह निवासी किसान राम औतार का कहना है कि अगर मिर्चा की फसल अच्छी हुई तो काफी मुनाफा होता है। जबसे वजीरगंज में मिर्चा मंडी लगने लगी है, तब से तमाम किसानों ने अन्य फसलें छोड़कर मिर्च की खेती करने लगे हैं। यहां बाहर से व्यापारी मिर्च खरीदने आते हैं, और अच्छा भाव मिल जाता है।
मिर्च की खेती से आय हुई दुगनी
चड़ौवा निवासी किसान सालिक राम कहते हैं कि जब से वह अपने खेत में मिर्च की खेती करने लगे हैं। तब से उनकी माली हालत ठीक हो गई है। मिर्च की फसल से नगद मुनाफा होता है, इसलिए अधिकतर किसान अब मिर्च की खेती करने लगे हैं। इस खेती के साथ दोहरी खेती हो जाती है। इसमें लहसुन, प्याज, बैगन आदि फसलें आसानी से हो जाती हैं।
यहां मिलता है अच्छा दाम
करनीपुर निवासी किसान हरीश कहते हैं कि उसने मिर्च की खेती शुरू की है। अन्य फसलों से मिर्च की खेती बेहतर है। राम मनोहर व उदयबीर बताते हैं कि सूबे के आसपास जिलों के साथ ही पड़ोसी देश नेपाल तक वजीरगंज मंडी से सब्जी के साथ ही मिर्च भी जाता है।
यहां होता है अच्छा व्यापार
भगोहर निवासी मिर्च व्यापारी सलीम खां कहते हैं कि मिर्च का व्यापार बहुत अच्छा है। किसानों को मिर्च का नगद भुगतान व अन्य मंडियों से अच्छे दाम मिलने से किसान ज्यादा आते हैं। यहां का मिर्च बाहर भेजने पर उसकी विक्री जल्दी हो जाती है, और व्यापार बेहतर होता है।
मिर्च की खेती से होता है अच्छा लाभ
लालमणि का लगाव मिर्च की खेती से इतना है कि वे बताते हैं कि एक एकड़ खेत में बीज,खाद, पानी,जोताई आदि में लगभग 15 से 16 हजार की लागत आती है जबकि फायदा दो लाख रुपए तक हो जाता है।

