मुश्ताक अहमद
गोंडा।होली पर्व का होली हिडोनिया से प्रबल सह सम्बन्ध है। होली हिडोनिया यानि होली पर्व के करीबी दिनों से शुरू होकर बाद तक चलने वाली मनोउन्माद की मनोदशा है। जिसके चंगुल में आकर बहुत से किशोर व युवा नशाखोरी,अमर्यादित,अश्लील व आक्रामक व्यवहार और अन्य मनोवृत्तियों से अशक्त हो जाते हैं।
ऐरा मेडिकल कालेज लखनऊ के किशोर मनोपरामर्शदाता डा० एम०जेड० मनदर्शन के अनुसार पिछले चार वर्षों में मनदर्शन मिशन सहयोग प्रदत्त किये गये अग्रगामी शोध में होली हिडोनिया से ग्रसित किशोरों व युवाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।
व्यक्तित्व विकार की है अहम भूमिका
शोध के अनुसार होली हिडोनिया से ग्रसित होने वाले किशोर व युवाओं में पहले से ही मौजूद व्यक्तित्व विकार पाए गए। जिनमें बार्डर लाइन पर्सनालिटी डिसआर्डर, पैरानयड पर्सनालिटी डिसआर्डर, प्रमुख है। होली का पर्व इन लोगों के लिए उत्प्रेरक का कार्य करता है, जिससे वे अपनी मनोवृत्तियों पर नियंत्रण खोने का स्वनिर्मित बहाना बनाकर नशाखोरी व अन्य उन्मादितत्यों पर उतारू हो जाते हैं और फिर शुरू हो जाता है मनोविकारों का नेक्स्ट गियर।
मनोगतिकीय कारक
किशोर व तरुण उम्र में मस्तिष्क के भावनात्मक केन्द्र ‘अमिगडाला’ अति सक्रिय होता है, जबकि मनोसंयम का केंद्र ‘सेरेब्रम’ पूर्ण विकसित नहीं होता। मनोउत्तेजक माहौल में कर्टिसाल व एड्रेनलिन न्यूरोट्रांसमीटर का स्राव अधिक हो जाता है, यही अवस्था घातक है।
ऐसे करें बचाव और उपचार
होली हिडोनिया से बचाव में परिजन व अभिभावकों का अहम रोल है। अभिभावक अपने पाल्य के व्यवहार व क्रियाकलापों पर पैनी नजर रखें। उनसे मैत्री पूर्ण सामंजस्य इस तरह बनाए कि किशोर व किशोरियों की अंर्तदृष्टि का सम्यक विकास हो सके। जिससे वे अपने व्यक्तित्व विकार को पहचान सकें।

