मुश्ताक अहमद
गोंडा।पवित्र माह रमजान अपने साथ इबादत और ढेरों सारी खुशियां लाता है। घर की रसोई हर तरह की लजीज खाने से भरी रहती है। हर दिन रोजा अफ्तार करने के लिए ढेरों पकवान बनाए जाते हैं। इबादत के साथ मियां-बीवी के बीच रिश्तों में और मिठासभर जाता है। वहीं घरों में मोबाइल ऐप के जरीए नई-नई रेसिपी बनायी जा रही है। इससे अफ्तार से लेकर सहरी को खास बनाया जा रहा है। रेसिपी नॉनवेज पकवानों में सबसे ज्यादा पसंद है। घरों पर रोजेदारों को बुलाकर यह लजीज पकवान खिलाया जा रहा है।
रमजान महीने में मुस्लिम महिलाओं का काम करने का रूटीन सहरी के इंतजाम के साथ ही शुरू हो जाता है। सहरी खत्म करने के बाद फज्र की नमाज और फिर बाकी बची नींद पूरी नहीं हो पा रही है।
रेसिपी का एप कर रहे डाउनलोड
रेसिपी एप की वजह से शौहर भी घर में बीवी के कामकाज में हाथ बंटाने में लगे रहते हैं। मोबाइल फोन से नए-नए लजीज पकवान के ऐप डाउनलोड कर रहे हैं। उस एप के जरीए तरह-तरह के व्यंजन बना रहे हैं। चिकन के कई आइटम बनाएं काशीपुर के सलीम और उनकी बीवी साथ मिलकर नई-नई रेसिपी तैयार कर रहे हैं। रमजान है इसलिए यह दोनों लजीज व्यंजन बनाकर रिश्तेदारों को भी भेज रहे हैं। सलीम बताते हैं कि इस पाक महीने में चिकन समोसा, पनीर समोसा,पनीर पकौड़ा आदि अब तक बना चुके हैं।
रोज बनाते हैं नए पकवान वहीं सोहना के रहने वाले अफजल हुसैन और नूरजहां भी रेसिपी के जरीए हर रोज अफ्तार में नए-नए पकवान बना रही हैं। ऐसी स्थिति में एप के जरीए अफ्तार खुद बनाते हैं। उनकी बीवी नूरजहां उनका सहयोग करती हैं।
घरों में पढ़ रहे हैं तरावीह की नमाज
रमजान उल मुबारक महीने में जिस गांव में मस्जिद नहीं है वहां के लोग घरों में छोटी तरावीह की नमाज परिवार के साथ पढ़ रहे हैं। और तरावीह नमाज के बाद लोग अल्लाह से गिड़गिड़ाकर अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं।
केवल भूखे रखने का नाम रोजा नहीं
माहे रमजान के रोजे केवल भूखे रहने का नाम नहीं है। इस महीने में आप अपनी मगफिरत के लिए जकात, फितरा और खैरात के साथ-साथ जी भर कर कुरान की तिलावत करें। यह महीना बुराई से तौबा कर अल्लाह की इबादत करने का खास महीना है।
रोजे का मतलब होता है कि बुराइयों से बचते हुए भलाई को अपनाना रोजा है। इंसान रोजा रखकर ऐसा बनने की कोशिश करता है जैसे उसे रब चाहता हो। रमजान का महीना बेहद पाक व रहमतों वाला होता है।
फारुख अहमद,समाजसेवी।

