गोंडा।वन नेशन-वन टैक्स की भांति वननेशन-वन एजूकेशन के बिना समता मूलक समाज की अवधारणा बेइमानी साबित होगी।ये बात मास के 24वें राज्य अधिवेशन में राष्ट्रीय संगठक ए०के० नन्द ने कहा।सांस्कृतिक परिवर्तन के बिना सामाजिक परिवर्तन की बात करना अंधों के शहर में आइना बेचने के समान है।

सांस्कृतिक परिवर्तन में महिलाओं का योगदान विषय पर सोनिया नंद ने अपने विचार व्यक्त किया। शिक्षा,संविधान,लोकतंत्र और न्याय की व्यवस्था विषय पर घनश्याम प्रजापति,भागीरथी मौर्य,अमृत लाल गौतम,काशीराम मौर्य,टीएन मौर्य,शिवानंद मौर्य,एनके आजाद,राजकुमार शर्मा,संतोष कुमार,हरिगेंद मौर्य,गौरव कुमार नन्द,अनुपम कुमार नन्द ने कहा कि सबको शिक्षा सबको न्याय ही लोकतंत्र की बहाली कर सकता है। दोहरी शिक्षा राष्ट्र के लिए घातक है।कारण ऐसी शिक्षा कभी भी समता मूलक समाज का निर्माण नहीं कर सकती है।
इस विषय पर सुभाष टाइगर,एमसी विमल,एनएन भारतीय,डाॅ.राम लखन,आरएल राक्षस,डा.मनोज कुमार गौतम,नेपाल से बाबूराम बौद्ध,राजकुमार यादव,राम गुलाम चौधरी,बीडी गौतम,शिवकुमार विश्वकर्मा,राजबहादुर,भवानीफेर,डाॅ.बीपी अशोक,कमलाकांत गौतम,तेलंगाना से मधु बावलकर,विद्या सागर,बिहार से जय प्रकाश,माया प्रकाश,असम से प्रेमदा चहरिया,कृष्णा चहरिया,हेरम्ब प्रसाद कोलिता,दिल्ली से सुनील बौद्ध सविता,राम दुलारी,श्रद्धा मौर्य,कमला देवी मौर्य,सीमा मौर्य,सुजाता बौद्ध,राज किशोर मौर्य,किशोरी लाल,दिलीप कुमार ने कहा।

