गोंडा।डॉ० राम शंकर द्विवेदी जिले के दीनदयाल शोध संस्थान के पूर्व निदेशक रहे मारवाड़ इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य मौजूदा समय में लोक सेवा संस्थान के प्रबंधक समाज के प्रति समर्पित हमेशा समाज व देश के प्रति चिंतित व्यक्ति अपनी लेखो से लोगों में एक नई ऊर्जा प्रदान करने वाले व्यक्ति सरल स्वभाव के धनी जितनी भी विशेषताए बताई जाएं कम है। हमेशा अपने लेख एवं कार्यों के माध्यम से समाज को जागरुक करते रहते हैं। श्री द्विवेदी का एक लेख प्रस्तुत किया गया है कि एक विद्वान ने कहा कि वही समाज तरक्की करता है।
जिसे अतीत के गौरव का ज्ञान हो,वर्तमान की पीड़ा का आभास हो और भविष्य के सपने हों।हमारा अतीत बहुत गौरवशाली रहा है।आध्यत्मिक क्षेत्र में तो हम विश्वगुरु थे ही,भौतिक दृष्टि से भी हमारी उपलब्धियां कम नहीं थीं।हमारे पूर्वजों ने इतनी चमत्कृत कर देने वाली खोजें कीं थीं कि आज के वैज्ञानिक उपलब्धियों से उनकी तुलना करने पर ज्ञात होता है कि वे लोग वर्षों पूर्व वे जो खोज चुके थे,आज के वैज्ञानिक उसे दुहरा भर रहेहैं।जैसे आज के सैकड़ों वर्षों पूर्व ही भारतीय खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने पता लगा लिया था कि पृथ्वी घूमती है और और सूर्य स्थिर रहता है तथा पृथ्वी 24 घण्टे में अपनी धुरी पर एक चक्कर लगा लेती है।यही नहीं आज के 2000 वर्ष पूर्व विक्रमादित्य के समय में हमारे पूर्वज उन तथ्यों को खोज चुके थे जो पश्चिम के वैज्ञानिकों को वर्षों बाद मालूम हुए। उदाहरणार्थ पेंड़ से फल गिरता देखकर पृथ्वी के गुरुत्वा कर्षण शक्ति का पता लगाने के लिए आज न्यूटन के गुण गाये जाते हैं। किंतु न्यूटन के वर्षों पूर्व रचित ग्रन्थ सिद्धांत शिरोमणि मे उल्लेख मिलता है, कि पृथ्वी का कोई आधार नहीं है,वह अपनी ही आकर्षण शक्ति से स्थित है।पृथ्वी गोल है ,समतल नहीं इस तथ्य की खोज भी सर्वप्रथम भारतीय वैज्ञानिक भाष्कराचार्य ने की थी। इसी प्रकार शून्य और दशमलव का आविष्कार सर्वप्रथम भारत ने की थी जिसका उपयोग आज सम्पूर्ण विश्व कर रहा है।
भारतीय ग्रन्थों में मिलता है कि प्राचीन काल में यहां विमानों का प्रचलन था तथा युद्ध विद्या अत्यंत परिष्कृत थी,अत्यंत विकसित तकनीक के अस्त्र शस्त्रों का प्रयोग होता था।विमानों और मिसाइलों के आविष्कार के पूर्व इसे कोरी कल्पना मानी जाती थी किन्तु आज हम इन विवरणों की सत्यता को स्वीकार करने के लिए बाध्य हैं।भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र लेसर रेज का पुंज था यह तथ्य भी कालांतर में सिद्ध हो जाएगा और पीछे चलें तो त्रेतायुग में समुद्र में पुल बांधा गया था जिसे लोग कोरी कल्पना मानते थे,आज नासा के वैज्ञानिकों ने उसकी ऐतिहासिकता सिद्ध कर दी है। वर्षों पूर्व निर्मित भवन और मंदिरों की भव्यता सब का मन मोह लेती है।अजंता और एलोरा की गुफाओं और उनके भित्ति चित्र देखकर सम्पूर्ण विश्व के पर्यटकों को दांतों तले उंगली दबाने के लिए विवश होना पड़ता है।आज भी यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है,जरूरत है उन्हें उचित मार्गदर्शन और अपेक्षित सहयोग मिलने की।

