मुश्ताक अहमद/इमरान अहमद
गोंडा। इस्लाम अनुयायियों का पवित्र माह है रमज़ान, इस पवित्र और पाक महीने में रहमतों व बरकतों का दिन रविवार से शुरू हो रहा है। इस पवित्र माह में रमज़ान के चांद की तस्दीक होते ही मस्जिदों व घरों में इबादत का दौर शुरू हो जाता है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में जहांं लोगों की चहलकदमी बढ़ गई है, तो वहीं बाजारों में रमज़ान से जुड़ी चीजों की खरीदारी भी बढ़ गई है।
चांद का दीदार होते ही मस्जिदें तरावीह की नमाज़ से गुलजार रहेंगी। इस मुकद्दस महीने में रहमतों व बरकतों की बारिश होती है। रोजा शुरू होते ही मुस्लिमों में इसकी अच्छी खासी खुशी देखने को मिल रही है।
2 मार्च से शुरू हो रहा इस पवित्र महीने को लेकर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तैयारियां जोरो पर चल रही है। वहीं बाजारों में रमज़ान से जुड़ी चीजों की भरमार लग गई है। इसी तरह नमाज़-ए-तरावीह शहर से लेकर गांवों व कस्बों की मस्जिदों में तैयारियां पूरी कर ली गई है।

रहमतों और बरकतों का महीना है रमज़ान
रमज़ानुल मुबारक का महीना बड़ा ही रहमतों व बरकतों का महीना है। मौलाना अफजल हुसैन ने बताया कि रमज़ान के इस महीने में अल्लाह अपने बंदो की हर नेकी पर सत्तर गुना शवाब ज्यादा बढ़ा देता है। और रिज़्क भी बढ़ा देता है। श्री हुसैन ने बताया कि रमज़ान के इस पूरे महीने में अल्लाह शैतान को कैद कर देता है। जिससे उसके बंदो की इबादत में खलल पैदा न हो सके।
पवित्र माह रमज़ान तीन अशरों में बंटा है
इस्लाम के पांच फर्ज अरकानों में रमज़ानुल मुबारक का रोजा भी है। रमजान के रोज़े को तीन अशरा यानि दस-दस दिनों का होता है। मौलाना अफजल हुसैन के मुताबिक रमज़ान का पहला अशरा रहमत का होता है। जिसमें बंदा अपने रब से रहमत की दुआएं मांगता है। दूसरा मगफ़िरत का जिसमें बंदा अपने गुनाहों की मांफी तलब करता है। वहीं रमज़ान का आखिरी अशरा जहन्नम की आग से निजात का होता है। तीनों अशरों में रोज़ेदार अपने रब से गिड़गिड़ाते हुए दुआएं करता रहता है।
बाजारों में छा गई सेंवई
बाजारों में रमज़ान से जुड़ी सभी जरूरियात की चीजें मिलने लगी है। फिर चाहे वो सेहरी से जुड़ी हो या इफ्तारी जुड़ी चीजे हो। बाजारों में सजी सिंवई, सूतफेनी व कचरी पापड़ या टोस्ट बंद। खासकर रोज़ेदारों के लिए खजूर व मिशवाक हर दुकानों पर मौजूद है।

