मुश्ताक अहमद
गोंडा। 20 साल पहले जिले की इंटरनेट स्पीड जितनी थी आज स्पीड घटकर आधे से कम हो गई है। नामी गिरामी कंपनियां हाई स्पीड इंटरनेट के कनेक्शन जल्द देने का दावा कई साल पहले से करती आ रही हैं। लेकिन अब ये दावा भी हवा हवाई साबित होने लगा है। मोबाइल व दूरसंचार माध्यमों के जानकार बताते हैं कि इंटरनेट के स्पीड के मामले में तीन साल पहले जिले की बेहतर स्पीड थी। 2 जी नेटवर्क से मिलने वाली स्पीड का मुकाबला मौजूदा समय में 4 जी व 5 जी स्पीड के इंटरनेट भी नहीं कर पा रहे हैं।
टावर भी देने लगे धोखा
जिले के विभिन्न कोनों में लगे तकरिबन 400 टावर अब गाढ़े वक्त में भी उपभोक्ताओं के लिए ठूंट बनकर खड़े हैं। इन टावरों से मिलने वाला नेटवर्क बेहद खराब दर्जे का होता है। बताया जा रहा है, कि इनसे मिलने वाली स्पीड टू जी डाटा के बराबर नहीं रहती। और तो और इन टावरों का लाभ भी किसी को नहीं मिल पाता है। उन्हें बातचीत करने में ही परेशानी खड़ी हो जा रही है।
हर कंपनी की हालत है खराब
जानकार बताते हैं कि हाई स्पीड इंटरनेट न होने के पीछे असल वजह ये है कि टावर पर ओबर डाटा ट्रैफिक है, यानि एक बार एक साथ ही हजारों मोबाइल चलते हैं। जिसके कारण स्पीड घटकर बेकार हो जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं के लिए बाकी नहीं रहा विकल्प
बोर्ड परीक्षा को लेकर बच्चों को आनलाइन फोन चलाने के लिए अब हाई स्पीड इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता बहुत बढ़ी हुई है। वहीं वर्क फ्राम व्यवस्था भी धराशाई हो रही है। उपभोक्ताओं का यह दर्द तब और अधिक बढ़ जा रहा है कि जब वे हाई स्पीड इंटरनेट के लिए कंपनी दर कंपनी चक्कर काटते हैं। लेकिन उन्हें फाइबर नेटवर्क,डब्ल्यूएलएल व ब्रांड बैण्ड जैसी चीजें नहीं मिल पा रही हैं।
सड़क निर्माण व अन्य खोदाई के वक्त कट गईं केंबिलें
20 साल पहले जिले के चप्पे-चप्पे पर दूर संचार विभाग ने सड़कों के किनारे अपनी केबिलें बिछा डाली थी। इंटरनेट की आवश्यकता महसूस करने वालों से जमानत धन राशि लेकर ब्रांड बैंण्ड कनेक्शन 26 घंटे के अंदर दे दिया जाता था,लेकिन समय बीतते इन सड़क किनारे की जमीन को खोदकर डाली गई केबिलें जगह-जगह से कट गईं। सड़कों के निर्माण के समय जब जेसीबी मशीनें लगी केबिलें कई जगह कट गई। ऐसे में सड़क के किनारे के कटे इन केबिलों को जोड़ने का काम भी विभाग सही से नहीं करा सका। अब हालत यहां तक उपज गए है कि इन केबिलों के माध्यम से सामान्य टेलीफोन भी उपभोक्ताओं की मांग पर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में ब्रांड बैण्ड का कनेक्शन विभाग को दे पाना अब मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो गया है।

