गोण्डा।जिला पंचायत सभागार हाल में शनिवार को फौजदारी से संबंधित मामलों को लेकर निःशुल्क विधि परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा व गोंडा के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश तिवारी बतौर मुख्य अतिथि रहे। शिविर में आए हुए जिले के विभिन्न जगहों के शिकायतकर्ता तथा कई अधिवक्ताओं ने अपनी अपनी समस्याएं वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मिश्रा के सामने रखी।

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मिश्रा ने उन समस्याओं से संबंधित आवश्यक जानकारियां व परामर्श लोगों को मुहैया कराई,साथ ही आश्वासन दिया की समस्या चाहे जैसी भी हो हर व्यक्ति को न्याय दिलाना उनका नैतिक कर्तव्य है। और जिसका पालन वह सुचारू रूप से करेंगे। नि:शुल्क विधिक परामर्श शिविर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को फौजदारी से संबंधित मामले चाहे वह उच्च न्यायालय से संबंधित हो या जनपद न्यायालय से उन्हें उचित विधिक परामर्श मुहैया कराना है। जिससे वर्षों से फौजदारी के मामले झेल रहे लोगों को आवश्यक सहायता व मामलों से उन्हें जल्द छुटकारा मिल सके। जिसको लेकर कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ताओं के द्वारा उन्हें निःशुल्क परामर्श दिया जायेगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय संबंधित मामलों में भी उन्हें उचित सुविधा प्रदान की जाएगी। बार एसोसिएशन गोंडा के पूर्व संयुक्त मंत्री शिव शंकर सिंह “नीशू” व आलोक मिश्रा के नेतृत्व में निशुल्क विधिक परामर्श शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें कार्यक्रम का संचालन जिले के अधिवक्ता बलराम बाबू शुक्ला ने किया। निःशुल्क विधिक परामर्श शिविर में उच्च न्यायालय के साथ जिले के भी कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी रही,जिनकी सहायता से वर्षों से कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे लोगों को बड़ी राहत मिल सकेगी। कार्यक्रम के दौरान गोंडा जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश तिवारी के साथ बलराम बाबू शुक्ला, अमन द्विवेदी, यशी द्विवेदी, व रश्मि चौधरी व अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी रही, हीं कार्यक्रम में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी व महामंत्री चंद्र मणि तिवारी पूर्व महामंत्री जगन्नाथ शुक्ल बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। शनिवार को लगभग 200 लोगों ने अपनी समस्याएं वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार मिश्रा के समक्ष रखी। उचित परामर्श देकर लोगों को आवश्यक सहायता मुहैया कराई, साथ ही उन्होंने कहा कि निशुल्क विधिक परामर्श शिविर का आयोजन अनवरत रूप से चलता रहेगा। जिससे हर पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलने में दिक्कत न हो।

